लोक निर्माण विभाग के अधिकारियों के मुताबिक दालमंडी में स्थापित लोगों ने हाईकोर्ट में जो याचिकाएं दाखिल की हैं उसमें तर्क दिया है कि पीडब्ल्यूडी की ओर से भवन और जमीन का अधिग्रहण भूमि अधिग्रहण एक्ट 2013 के तहत नहीं किया जा रहा है। इसके जवाब में प्रशासन ने शपथ पत्र दाखिल किया और हाईकोर्ट को बताया कि सारा अधिग्रहण एक्ट के तहत नहीं बल्कि साल 2015 के शासनादेश के क्रम में आपसी समझौते के आधार पर किया गया है। एक्ट के तहत उसी को संपत्ति का वारिस माना जाएगा जिसका नाम खतौनी में है। इससे कई लोग पात्रता की सूची से बाहर हो जाएंगे। कोर्ट ने इसे सही मानते हुए 92 याचिकाएं खारिज कर दीं।
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24 भवनों का 14 करोड़ दिया जा चुका मुआवजा
लोक निर्माण विभाग की ओर से अब तक दालमंडी के 24 भवनों को अधिग्रहण किया गया है। इसके लिए 14 करोड़ रुपये मुआवजा दिया गया है। जैसे जैसे संपत्ति पर हकदार सही पाए जा रहे हैं, वैसे-वैसे मुआवजा दिया जा रहा है। संपत्ति के कागजों की जांच के लिए लगातार लोगों को कार्यालय बुलाया जा रहा है।
पीडब्ल्यूडी की ओर साल 2015 के शासनादेश के क्रम में आपसी समझौते के आधार पर मुआवजा दिया जा रहा है। संपत्ति के असली मालिक की पहचान के लिए संबंधित व्यक्ति का निवास उक्त स्थान पर 40 से 50 वर्ष पहले का हाेना देखा जा रहा है। संबंधित भवन की रजिस्ट्री के कागज भी देखे जा रहे हैं। पीला कार्ड, आधार कार्ड देखने के साथ ही बिजली बिल की जांच की जा रही है।
क्या बोले अधिकारी
दालमंडी पहली ऐसी परियोजना है जिसमें 4 महीने में ही 117 मामले हाईकोर्ट पहुंचे हैं। 25 मामले में जिला प्रशासन की ओर से शपथ पत्र दाखिल किया जाएगा। परियोजना का काम 15 जून तक पूरा होगा।
-केके सिंह, अधिशासी अभियंता, प्रांतीय खंड, लोक निर्माण विभाग, वाराणसी