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UP: पोस्टमैन से लेकर फर्जी आधार तक... साइबर ठगी गिरोह का पूरा खेल आया सामने, 25 लाख की ऐसे हुआ खुलासा

Tue, 28 Jul 2026 05:44 PM IST
Pragati Chand ललित शंकर पांडेय, अमर उजाला ब्यूरो, वाराणसी।

सार

Varanasi News: पुलिस जांच में सामने आया है कि गिरोह की सरगना आरती ने कानपुर के कारोबारी को जूडियो की फ्रेंचाइजी दिलाने का झांसा देकर 25 लाख रुपये की साइबर ठगी की थी। 
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साइबर क्राइम - फोटो : AI
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विस्तार
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म्यूल खातों के जरिये साइबर ठगी करने वाले गिरोह के तार बिहार के पटना से जुड़े हैं। गिरोह की सरगना आरती बैंक किट पटना निवासी राहुल कुमार को 20 हजार रुपये में बेचती थी। पुलिस जांच में सामने आया है कि आरती ने कानपुर के कारोबारी कौत्स पांडेय को जूडियो की फ्रेंचाइजी दिलाने का झांसा देकर 25 लाख रुपये की साइबर ठगी की थी। ठगी की रकम चार किश्तों में आरती के सहयोगी अनिल कुमार के बैंक खाते में पहुंची थी। यह बैंक खाता भी आरती ने ही खुलवाया था।

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पुलिस के अनुसार, आरती पड़ाव के सुजाबाद स्थित किराये के मकान में युवाओं को साइबर ठगी का प्रशिक्षण देती थी। सिगरा पुलिस ने रविवार को गिरोह की सरगना 22 वर्षीय आरती, एक पोस्टमैन समेत छह आरोपियों को गिरफ्तार किया था। सिगरा इंस्पेक्टर शिवाकांत मिश्रा ने बताया कि कानपुर के यशोदा नगर निवासी कौत्स पांडेय ने एनसीआरपी पोर्टल पर शिकायत दर्ज कराई थी। 

उन्होंने बताया कि जूडियो की फ्रेंचाइजी दिलाने के नाम पर उनसे 25 लाख रुपये की साइबर ठगी की गई। जांच में पता चला कि यह रकम चार किश्तों में सिगरा के छित्तूपुर निवासी अनिल कुमार के बैंक खाते में भेजी गई थी। पुलिस ने अनिल कुमार को हिरासत में लेकर पूछताछ की तो जानकारी मिली कि खाते का संचालन सोनभद्र निवासी आरती करती थी।
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पुलिस के अनुसार, आरती कुमारी ने आधार कार्ड में दर्ज अपना स्थायी पता घघरी, थाना बभनी (सोनभद्र) से बदलकर शिवपुरवा, जयप्रकाश नगर, छित्तूपुर कर लिया था। इसी आधार पर उसने 5,000 रुपये का लालच देकर आईडीएफसी बैंक, महमूरगंज में एक व्यक्ति के नाम से खाता खुलवाया। 

इसी तरह उसने कई लोगों के नाम पर विभिन्न बैंकों में खाते खुलवाए और प्रति खाता 5,000 रुपये दिए। पुलिस का आरोप है कि आरती पड़ाव के सुजाबाद स्थित किराये के मकान में युवाओं और युवतियों को साइबर ठगी की ट्रेनिंग देती थी।पुलिस के अनुसार किराये के मकान से आरती, मालती देवी और उमंग कुमार को गिरफ्तार किया गया था। 

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पूछताछ में आरती ने स्वीकार किया कि वह पैसों का लालच देकर लोगों के आधार कार्ड में दर्ज स्थायी पते में जितेंद्र कन्नौजिया के साथ मिलकर कूटरचना कर उन्हें सिगरा का दिखाती थी। इसके बाद फर्जी पते वाले आधार कार्ड के आधार पर संबंधित व्यक्ति के नाम से बैंक खाते खुलवाए जाते थे। 

बैंक किट (चेकबुक, डेबिट कार्ड) नए पते पर पहुंचने से पहले ही पोस्टमैन शोभनाथ से मोबाइल पर संपर्क कर 200 रुपये देकर प्राप्त कर लिए जाते थे। प्रति डिलीवरी पोस्टमैन शोभनाथ को 200 रुपये और आधार कार्ड में कूटरचना करने के लिए जितेंद्र कन्नौजिया को 600 रुपये दिए जाते थे।
 
बैंक किट और मोबाइल सिम पटना भेजे जाते थे
पुलिस के अनुसार, बैंक किट और उससे जुड़े मोबाइल सिम को पैक कर कूरियर के माध्यम से पटना निवासी रोहित और राहुल कुमार के पास भेजा जाता था। प्रत्येक बैंक किट के बदले आरती को 20 हजार रुपये मिलते थे। उमंग कुमार और मालती देवी के बैंक खातों का इस्तेमाल करने के एवज में उन्हें 5-5 हजार रुपये दिए जाते थे। पुलिस का कहना है कि आरती और जौनपुर के केराकत तहसील क्षेत्र के चक्के निवासी जितेंद्र कन्नौजिया मिलकर फर्जी आधार कार्ड के जरिए विभिन्न बैंकों में खाते खुलवाते थे। एसीपी चेतगंज शुभम कुमार सिंह ने बताया कि गिरोह से जुड़े अन्य आरोपियों की तलाश के लिए पुलिस की एक टीम गठित की गई है। पटना में रहने वाले रोहित और राहुल कुमार के बारे में भी जानकारी जुटाई जा रही है। 
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