पूछताछ में आरती ने स्वीकार किया कि वह पैसों का लालच देकर लोगों के आधार कार्ड में दर्ज स्थायी पते में जितेंद्र कन्नौजिया के साथ मिलकर कूटरचना कर उन्हें सिगरा का दिखाती थी। इसके बाद फर्जी पते वाले आधार कार्ड के आधार पर संबंधित व्यक्ति के नाम से बैंक खाते खुलवाए जाते थे।
बैंक किट (चेकबुक, डेबिट कार्ड) नए पते पर पहुंचने से पहले ही पोस्टमैन शोभनाथ से मोबाइल पर संपर्क कर 200 रुपये देकर प्राप्त कर लिए जाते थे। प्रति डिलीवरी पोस्टमैन शोभनाथ को 200 रुपये और आधार कार्ड में कूटरचना करने के लिए जितेंद्र कन्नौजिया को 600 रुपये दिए जाते थे।
बैंक किट और मोबाइल सिम पटना भेजे जाते थे
पुलिस के अनुसार, बैंक किट और उससे जुड़े मोबाइल सिम को पैक कर कूरियर के माध्यम से पटना निवासी रोहित और राहुल कुमार के पास भेजा जाता था। प्रत्येक बैंक किट के बदले आरती को 20 हजार रुपये मिलते थे। उमंग कुमार और मालती देवी के बैंक खातों का इस्तेमाल करने के एवज में उन्हें 5-5 हजार रुपये दिए जाते थे। पुलिस का कहना है कि आरती और जौनपुर के केराकत तहसील क्षेत्र के चक्के निवासी जितेंद्र कन्नौजिया मिलकर फर्जी आधार कार्ड के जरिए विभिन्न बैंकों में खाते खुलवाते थे। एसीपी चेतगंज शुभम कुमार सिंह ने बताया कि गिरोह से जुड़े अन्य आरोपियों की तलाश के लिए पुलिस की एक टीम गठित की गई है। पटना में रहने वाले रोहित और राहुल कुमार के बारे में भी जानकारी जुटाई जा रही है।