पुलिस के अनुसार, आरोपी पहले बैंक और आरटीओ चालान भुगतान से संबंधित फर्जी डिजिटल फ्लायर बनाकर लोगों को एक कूटरचित एपीके फाइल के साथ भेजते थे। जैसे ही पीड़ित उस एप्लीकेशन को मोबाइल में इंस्टॉल करता था, उसका मोबाइल एक्सेस और आने वाले सभी एसएमएस ठगों के पास पहुंच जाते थे।
इसके बाद आरोपी एसएमएस बॉम्बर के जरिए सैकड़ों टारगेटेड यूजर को मैसेज भेजकर भ्रम की स्थिति पैदा करते थे। इसी दौरान वे पीड़ित के बैंक खाते से ट्रांजेक्शन कर पैसे निकाल लेते थे। ठगी की रकम टेलीग्राम बॉट के माध्यम से म्यूल बैंक खातों में ट्रांसफर कर दी जाती थी और फिर कार्डलेस पेमेंट के जरिए नकद निकाली जाती थी।
पुलिस के अनुसार, गिरफ्तार आरोपी नागेश्वर मंडल के खिलाफ झारखंड के साइबर क्राइम थाना जामताड़ा में भी धोखाधड़ी और आईटी एक्ट की विभिन्न धाराओं में पहले से मुकदमा दर्ज है। पुलिस आरोपियों से पूछताछ कर गिरोह के अन्य सदस्यों की तलाश कर रही है।