एडीसीपी क्राइम श्रुति श्रीवास्तव ने बताया कि 12वीं पास दीपक गिरोह का सरगना है। कक्षा आठ पास भानू साइबर ठगी से मिले पैसों को इधर से उधर करने के लिए बैंक खाते उपलब्ध कराता है। कंप्यूटर साइंस से बीटेक कुनाल साइबर क्राइम से संबंधित इंस्टीट्यूट चलाता है।
गिरोह की ओर नोएडा के सेक्टर-10 में काॅल सेंटर बनाया गया है। गिरोह टाइम्स जॉब इंटरनेट (कूल बूट मीडिया) और वर्क इंडिया से अवैध तरीके से नौकरी खोजने वालों का डेटा लेता है। फिर, नौकरी खोजने वालों को विदेशी कंपनियों में उनकी योग्यतानुसार विभिन्न पदों पर नौकरी दिलाने का झांसा देते हैं।
नौकरी खोजने वालों को फर्जी डिजिटल हस्ताक्षरित इंटेंट लेटर, ऑफर लेटर और इंटरव्यू लेटर भेजकर झांसे में लेते हैं। इसके बाद फीस और टैक्स के नाम पर कथित कंपनी के म्यूल बैंक खातों में पैसे मंगाए जाते हैं। साइबर अपराधी अपनी पहचान छिपाने के लिए म्यूल बैंक खातों और फर्जी नाम-पते के सिम का प्रयोग करते हैं।