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भारतीय संस्कृति से अवगत कराएगी संस्कृति संसद

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संस्कृति संसद का उद्देश्य भारतीय संस्कृति के प्रति व्याप्त नकारात्मक सोच को दूर करना है। संस्कृति संसद ने कुछ लक्ष्य निर्धारित किए हैं, जिन्हें 10 साल में पूरा किया जाएगा। अखिल भारतीय संत समिति एवं श्री काशी विद्वत परिषद के मार्गदर्शन में गंगा महासभा की ओर से 12 से 14 नवंबर तक संस्कृति संसद का आयोजन किया जाएगा। यह जानकारी आरएसएस के वरिष्ठ प्रचारक डॉ. इंद्रेश कुमार, राज्यसभा सांसद रूपा गांगुली, काशी विद्वत परिषद के महामंत्री प्रो. रामनारायण द्विवेदी और अखिल भारतीय संत समिति के राष्ट्रीय महामंत्री स्वामी जितेंद्रानंद सरस्वती ने प्रेसवार्ता में दी।
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डॉ. इंद्रेश कुमार ने कहा कि सर्व विद्वानों ने माना है कि काशी संस्कृति की राजधानी है और यहां संस्कृति संसद के कार्यक्रम का आयोजन होना संस्कृति को नई दिशा प्रदान करेगा। सांसद रूपा गांगुली ने कहा कि तीन दिवसीय संस्कृति संसद में कुल 14 सत्र होंगे। छह समानांतर सत्रों का भी आयोजन किया जाएगा। आयोजन रुद्राक्ष अंतरराष्ट्रीय सहयोग एवं सम्मेलन केंद्र में होगा। प्रो. रामनारायण द्विवेदी ने बताया कि संस्कृति संसद में देश भर से प्रतिभागी एवं बौद्धिक नेतृत्व कर्ता आ रहे हैं। संसद के आयोजन से संस्कृति की दिशा तय करने में मदद मिलेगी।
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