श्री काशी विश्वनाथ मंदिर के स्वर्ण शिखर की सफाई करने गुरुवार को यहां पहुंची टीम को बैरंग लौटना पड़ा। दरअसल, बिना किसी लिखित आदेश के यह टीम स्वर्ण शिखर की सफाई के लिए यहां पहुंची थी। लिखित आदेश नहीं दिखाने पर मंदिर की सुरक्षा में तैनात सीआरपीएफ के जवानों ने उन्हें रोक दिया। खुफिया विभाग ने भी मामले की रिपोर्ट उच्चाधिकारियों को भेजी है।
दोपहर में काशी विश्वनाथ मंदिर कॉरिडोर से जुड़े अधिकारी आलोक सिंह के साथ तीन सदस्यीय टीम बंगलूरू से यहां आई थी। इनमें बंगलूरू की टाटा कंपनी के जीएम राधा भल्लान, विजय कुमार होई और संजय दुग्गड़ थे।
मंदिर में दर्शन-पूजन के बाद ये तीनों आलोक सिंह के साथ मंदिर की छत पर गए। पहले स्वर्ण शिखर का अवलोकन किया। शिखर के पूर्वी भाग के निचले स्तर से शिखर की सफाई का काम राधा भल्लान के निर्देशन में शुरू हुआ ही था कि मौके पर पहुंचे सीआरपीएफ जवानों ने उन्हें रोक दिया और उनसे लिखित आदेश दिखाने को कहा।
आलोक सिंह ने मुख्य कार्यपालक अधिकारी के मौखिक आदेश पर आने की बात कही लेकिन सीआरपीएफ जवान नहीं माने और उन्हें लौटा दिया। वे अपने साथ सफाई के लिए केमिकल भी लाए थे।
इस बारे में श्रीकाशी विश्वनाथ मंदिर के मुख्य कार्यपालक अधिकारी विशाल सिंह से दूरभाष पर संपर्क करने का प्रयास किया गया लेकिन उन्होंने कॉल रिसीव नहीं की।