बुवाई के सीजन में नोटबंदी से खाद-बीज का संकट गहरा गया है। परेशान किसानों को सोमवार को भी पुराने नोटों से खाद-बीज नहीं मिले। हालांकि सोमवार की दोपहर में इसकी घोषणा के बाद किसान गोदामों पर पहुंचे लेकिन वहां पुराने नोट नहीं स्वीकार किए गए। जिला कृषि अधिकारी सुभाष मौर्य का कहना है कि लिखित आदेश नहीं आया है। बावजूद इसके सभी खाद-बीज विक्रय केंद्रों को मौखिक आदेश दिया गया है कि मंगलवार से पुराने नोट लेकर किसानों को खाद-बीज दें। किसानों का कहना है कि जल्द खाद-बीज उपलब्ध नहीं हुआ तो रबी की बुआई प्रभावित हो जाएगी।
आराजी लाइन के राजकीय बीज गोदाम से किसानों को पुराने नोटों से बीज नहीं मिल रहे हैं। किसानों का कहना है कि घोष्ाणा के बाद भी पुराने नोट नहीं लिए जा रहे हैं। राजकीय बीज गोदाम जंसा में गेहूं, मटर, सरसों के बीज उपलब्ध हैं मगर पुराने नोट के पेंच के चलते किसान यहां से खाली हाथ वापस जा रहे हैं।
दीनदासपुर के पूर्व जिला पंचायत सदस्य जितेंद्र सिंह, सुशील सिंह, जंसा के केडी मौर्य अनिल मौर्य, क्षेत्र पंचायत सदस्य अशोक पटेल व किसान विद्यालय समिति के डाॅ. कमलेश्वर सिंह, नीरज पाण्डेय ने मांग की है कि बीज-खाद पुराने नोट से दिए जाएं या फिर उधारी दिया जाए। बीज गोदाम प्रभारी नरेंद्र नाथ मिश्रा ने बताया कि एक दो दिन पुराने नोट लेकर बीज वितरित किए गए थे लेकिन उन्हें बनारस स्थित मुख्य शाखा में जमा करना बहुत मुश्किल है। फुटकर की भी समस्या है। पीसीएफ गोदाम मिल्किपुर के विक्रय प्रभारी सुधीर कुमार ने बताया कि यहां पर 17 नवंबर तक पुराने नोट लिए गए थे पर अब यह बंद हो गया है। यहां खरीदारी करने आए अरुण यादव, संतोष पटेल, पुरानी नोटों के चलते बिना खाद लिए लौट गए।