दस्तावेज के अनुसार, आरोपी ने वर्ष 2021-22 में जाली प्रमाण पत्रों के दम पर बोर्ड में पंजीयन कराया था। इसके तुरंत बाद उसने शिवदासपुर क्षेत्र में अपना अस्पताल शुरू कर दिया और पिछले चार वर्षों से नियमित रूप से ओपीडी चलाकर मरीजों को दवाएं बांट रहा था।
आयुर्वेद निदेशालय, लखनऊ ने वाराणसी के क्षेत्रीय आयुर्वेदिक एवं यूनानी अधिकारी को औपचारिक पत्र भेजकर स्पष्ट निर्देश दिए हैं कि डॉ. जितेंद्र चक्रवाल यदि जिले में कहीं भी क्लीनिक या अस्पताल संचालित कर रहे हैं, तो तत्काल प्रभाव से उसका लाइसेंस रद कर विधिक कार्रवाई की जाए। साथ ही, उनके मरीजों का इलाज करने पर तत्काल रोक सुनिश्चित की जाए। इसके बावजूद, स्थानीय स्तर पर आरोपी का रिकॉर्ड न मिलने से विभागीय मॉनिटरिंग और निजी क्लिनिकों के जमीनी सत्यापन की व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े हो रहे हैं।
आरोपी का कोई भी रिकॉर्ड हमारे पास मौजूद नहीं है। शासन से लिखित आदेश आने का इंतजार है। आदेश के बाद आगे की कार्रवाई होगी। - डॉ. अरविंद सिंह, क्षेत्रीय आयुर्वेदिक एवं यूनानी अधिकारी