बालू कारोबारियों को जिला प्रशासन और खान विभाग की छत्रछाया मिल गई है। पोकलेन और नाव पर मोटर लगाकर खनन कराने का मामला अभी थमा नहीं था कि एक कंपनी ने बालू खनन के लिए सोन नदी की धारा ही रोक दी।
ठेकेदार के कारिंदों ने नदी के इस पार से उस पार तक अस्थाई पुल बना दिया है और अपनी साइट बरहमोहरी के बजाय उस पार हर्रा में बालू खनन करवा रहे हैं। यह इलाका सेंचुरी क्षेत्र के करीब है। यहां पुल बनाना तो दूर, नदी से बालू निकालने पर भी पाबंदी है।
ई-टेडरिंग के जरिये जिले में बालू की छह साइट स्वीकृत हुई हैं। इनमें से पांच साइटों पर खनन शुरू हो गया है। इनमें खेवबंधा में दो, बरहमोरी, पिपरडीह और नगवां में एक एक बालू साइटों पर खनन हो रहा है। जबकि खेवबंधा की एक साइट पर पर्यावरण विभाग की एनओसी न मिलने के नाते काम अभी शुरू नहीं हो सका है।
बिहार और झारखंड की सीमा से सटे बरहमोरी में एक कंपनी को 80 हजार घन मीटर बालू निकालने की इजाजत मिली है। बरहमोरी साइट काफी अंदर जाकर है। बालू खनन के लिए कंपनी से जुड़े लोगों ने सोन नदी की धारा को रोकते हुए एक अस्थायी पुल का निर्माण करा दिया है और नदी के उस पार के हर्रा गांव स्थित साइट से बालू का खनन करा रहे हैं।
पिछले दिनों जब अस्थायी पुल का निर्माण हो रहा था तब एक प्रशासनिक अधिकारी और खान विभाग के लोग मौके पर गए थे। पूरा वाकया देखा भी लेकिन कार्रवाई करने की हिम्मत नहीं जुटा सके। कंपनी अपना खुद का कोई बड़ा प्रोजेक्ट तैयार करा रही है।
यहां का बालू उसी प्रोजेक्ट के लिए भेजा जा रहा है। जिलाधिकारी पीके उपाध्याय ने कहा कि अभी मामले की जानकारी हुई है। खान अधिकारी और राजस्व टीम को मौके पर भेज रहे हैं। जांच के बाद कड़ी कार्रवाई की जाएगी।