उपनिरीक्षक ने बताया कि कैंट पुलिस के सहयोग से अडिग को वाराणसी के वरुणा पुल स्थित उनके आवास से सोमवार की शाम गिरफ्तार किया गया। उपनिरीक्षक ने अदालत को बताया कि आरोपी को रेल मार्ग से नई दिल्ली ले जाना है। ऐसे में ट्रांजिट रिमांड दिया जाए। अदालत ने कहा कि विवेचक को निर्देशित किया जाता है कि आरोपी को 22 अगस्त तक न्यायालय अवधि में पटियाला हाउस कोर्ट में पेश किया जाए।
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अंतिम जमानत के लिए गुहार लगाई, नहीं मिली सफलता :
आरोपी अडिग के अधिवक्ता होने के कारण यूपी बार काउंसिल के चेयरमैन हरिशंकर सिंह और सेंट्रल बार एसोसिएशन के अध्यक्ष शिवपूजन सिंह गौतम सहित अन्य वरिष्ठ अधिवक्ताओं ने सीजेएम से लेकर जिला जज की कोर्ट तक अंतरिम जमानत की गुहार लगाई। हालांकि अधिवक्ताओं की दलीलें और अनुरोध काम नहीं आया।
क्यों रखा नाम अडिग :
नरेंद्र नाथ दूबे अडिग को काशी का धरतीपकड़ भी कहा जाता है। इनका नाम है अडिग इसलिए हुआ है क्योंकि 1984 से लगातार लोकसभा, विधानसभा और स्नातक चुनाव और उपचुनाव लड़ते आ रहे हैं। हार रहे हैं मगर अपने इरादे से डिग नहीं रहे। नरेंद्र नाथ दूबे अडिग ने पांचवीं बार राष्ट्रपति चुनाव के लिए पर्चा भरा था। नरेंद्र नाथ दूबे अडिग पेशे से वाराणसी कचहरी में वकील हैं। एमए, एलएलबी की पढ़ाई कर चुके नरेंद्र नाथ दूबे अडिग 1984 में वाराणसी के एक विधानसभा सीट से चुनाव लड़े। तब से लेकर आज तक जितने भी विधानसभा, लोकसभा, स्नातक विधान परिषद और उपचुनाव हुए सभी में नामांकन किया। 2014 के लोकसभा चुनाव में भी बनारस से पीएम मोदी के खिलाफ भी दावेदारी पेश की थी, मगर उनकी जमानत जब्त हो गई।
इसके आलावा दो बार राष्ट्रपति और एक बार उप राष्ट्रपति का नामंकन किया, लेकिन हर बार मामला खारिज हो गया। इन्होंने जितने भी चुनाव लड़े उनमें से कुछ किन्हीं कमियों के कारण रद्द हो गए, बाकी जो पूरे हुए उनमे से किसी में जमानत तक जब्त हो गई थी।
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