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पूर्वांचल में गैंगवार, अपने ही कर रहे अपनों की हत्या

Sun, 09 Apr 2017 11:59 AM IST
amarujala.com- Written by: पुष्पेन्द्र कुमार त्रिपाठी
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mukhtar ansari brijesh singh - फोटो : अमर उजाला
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बसपा नेता रामबिहारी चौबे की हत्या और इस मामले में अजय सिंह मरदह की गिरफ्तारी, दोनों ही घटनाओं में नुकसान सेंट्रल जेल में कैद एमएलसी बृजेश सिंह का हुआ। दोनों ही बृजेश सिंह के बेहद करीबी थे। वहीं, बृजेश के ही एक करीबी द्वारा दूसरे की हत्या के खुलासे से समर्थकों में खलबली मच गई है।
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समर्थकों का मानना है कि बृजेश खेमे में अरसे बाद उपजे असंतोष और अविश्वास के इस माहौल का फायदा उठाने उनके धुर विरोधी मुख्तार अंसारी और फरार इनामी बीकेडी उठा सकते हैं।

बृजेश सिंह के करीबी रहे ठेकेदार सुनील सिंह की हत्या वर्ष 2004 में सिगरा क्षेत्र के संत रघुवर नगर में की गई थी। इस हत्या का आरोप भी अजय मरदह सहित अन्य पर था। बताया जाता है कि बृजेश और उनके कुछ करीबियों ने अपने खेमे में डैमेज कंट्रोल के प्रयास शुरू कर दिए हैं।
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बता दें कि बृजेश के पिता रवींद्रनाथ सिंह उर्फ भुल्लर सिंह की 1984 में हत्या के बाद बीकेडी के परिवार से उनकी अदावत का सिलसिला शुरू हुआ था। 1985 में बीकेडी के पिता हरिहर सिंह की हत्या हुई। 1989 में बीकेडी के चाचा प्रेमप्रकाश सिंह उर्फ झगड़ू की हत्या कर दी गई।

1995 में बीकेडी के भाई पांचू सिंह का एनकाउंटर कर दिया गया। इसी दौरान बीकेडी के रिश्तेदार शिव सिंह और चाचा बनारसी सिंह की भी हत्या हो गई।  इसके बाद जुलाई, 2013 में धौरहरा में बृजेश के चचेरे भाई सतीश सिंह की हत्या कर दी गई।
 
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योगीराज में चुलबुल की स्कॉर्पियो का चालान और सुशील की चली नहीं

susheel singh - फोटो : अमर उजाला
इससे पहले मई, 2013 में बृजेश के करीबी अजय खलनायक पर टकटकपुर में ताबड़तोड़ गोलियां चलाई गई लेकिन वे और उनकी पत्नी बाल-बाल बच गईं। वहीं, बृजेश और मुख्तार के बीच अदावत का सिलसिला 1988 में शुरू हुआ।

इसी साल बृजेश के दोस्त त्रिभुवन सिंह के भाई कांस्टेबल राजेंद्र सिंह की 1988 में हत्या की गई। इस मामले मेें साधु सिंह के साथ ही मुख्तार अंसारी पर भी आरोप था।

साधु सिंह की हत्या के बाद जब मुख्तार के हाथ में उसके गैंग की कमान आ गई तो ठेकेदारी और झारखंड के कोयला कारोबार सहित अन्य व्यापारिक प्रतिस्पर्धाओं को लेकर बृजेश से दुश्मनी बढ़ती चली ही गई। रसूखदार ‘कपसेठी हाउस’ के साथ बीते सात दिनों में दो ऐसी घटनाएं हुईं कि लोगों के बीच संदेश गया कि योगीराज में सिर्फ कानून की ही चलेगी। कुछ ही दिन पहले की बात है सर्किट हाउस के सामने भाजपा के पूर्व एमएलसी चुलबुल सिंह की दो स्कॉर्पियो का चालान नो पार्किंग जोन में खड़ी होने के कारण कर दिया गया था।

पुलिस ने यह परवाह भी नहीं कि वो खुद दिग्गज भाजपाई, उनके बेटे सुशील सिंह सत्ताधारी दल के विधायक और छोटे भाई बृजेश सिंह एमएलसी हैं। वहीं गुरुवार को अजय मरदह के मामले में विधायक सुशील सिंह की पैरवी को पुलिस ने पूरी तरह खारिज कर दिया और ताकीद भी कि कानून के रास्ते में न आएं।
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