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डकैतों के साथ मुठभेड़ में जौनपुर का लाल शहीद, सीएम योगी ने जताया दुःख

Fri, 25 Aug 2017 10:49 AM IST
ब्यूरो, अमर उजाला, जौनपुर
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शहीद दरोगा जयप्रकाश सिंह - फोटो : अमर उजाला
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चित्रकूट के मानिकपुर के निही चिरैया जंगल में गुरुवार की भोर में सात लाख के इनामी डकैत बबली कोल गैंग से हुई पुलिस की मुठभेड़ में डकैतों की गोली से  रैपुरा थाने पर तैनात जौनपुर जिले के बनेवरा गांव निवासी दरोगा जयप्रकाश सिंह के शहीद हो गए।
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यह सूचना मिलते ही जहां उनके घर में कोहराम मच गया वहीं गांव के लोग शोकाकुल हो गए। जो जहां था वहीं से शहीद दरोगा के घर को चल पड़ा। जेपी सिंह के छोटे भाई व गोरखपुर में तैनात सिपाही शिवप्रकाश सिंह घटना की जानकारी के बाद घर के लिए रवाना हो गए। 

बनेवरा गांव में गुरुवार की सुबह आम दिनों की तरह ही थी। महिलाएं तीज को लेकर उत्साहित थीं। सुबह नौ बजे के करीब नेवढ़िया थाने के थानाध्यक्ष अजित सिंह ने रैपुरा थाने पर दरोगा जयप्रकाश सिंह के घर पर फोन किया और उनकी शहादत की सूचना दी।
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जानकारी होते ही घर में रोनापीटना मच गया। तीज के उल्लासित माहौल में विलाप के स्वर फूटे तो गांव भर चौकन्ना हो गया। आसपास के लोग दौड़ कर श्याम बिहारी सिंह के घर की दौड़ पड़े। यहां उनके सबसे बड़े पुत्र जयप्रकाश सिंह की शहादत सूचना मिली तो सभी सन्न रह गए।

यह खबर पूरे गांव में फैल गई तमाम लोगों ने टीवी सेट खोल लिए और घटना के बारे में जानकारी लेने लगे। उधर जयप्रकाश सिंह की शहादत की जानकारी होते ही क्षेत्राधिकारी मडियाहूं रामभुवन यादव समेत इलाके के तमाम लोग उनके घर पहुंच गए। यह सिलसिला पूरे दिन बना रहा।

गांव और आसपास लोग उनके मिलनसार स्वभाव और गांव के छोटे-बडे़ सभी लोगों की मदद के लिए हमेशा तत्पर रहने को लेकर चर्चा करते रहे।  


मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने दरोगा जेपी सिंह के शहीद होने पर दुःख जताया है। सीएम योगी ने ट्वीट कर कहा कि चित्रकूट में डकैत बबली कोल के साथ मुठभेड़ में शहीद हुए सब इंस्पेक्टर जेपी सिंह की वीरता को नमन व श्रद्धांजलि।  चित्रकूट में डकैत बबली कोल के साथ मुठभेड़ में शहीद हुए सब इंस्पेक्टर जेपी सिंह की वीरता को नमन व श्रद्धांजलि pic.twitter.com/EHdLoEuZao — CM Office, GoUP (@CMOfficeUP) August 24, 2017


   

पत्नी ने रखा था तीज का व्रत, पति के मौत की सूचना आई

शहीद की 90 वर्षीय दादी रामदुलारी सिंह का रो-रो कर बुरा हाल - फोटो : अमर उजाला
शहीद दरोगा की पत्नी चंदा सिंह को क्या पता था कि जिस पति की लंबी उम्र के लिए उन्होंने आज तीज का व्रत रखा है वह अब इस दुनिया में नहीं हैं। बेटे शुभम व शिवम को भी पिता के शहीद होने की जानकारी नहीं दी गई।

चंदा दोनों बेटों के साथ राजस्थान के कोटा में रहती हैं। दोनों बच्चे वहां सीपीएमटी की तैयारी कर रहे हैं। शहीद दरोगा के चाचा  मंगला सिंह ने बताया कि जयप्रकाश की पत्नी व बच्चों को दुर्घटना की खबर दी गई है उनके शहीद होने की नहीं। 

 शहीद दरोगा के चाचा मंगला सिंह रो-रो कर कह रहे थे कि अभी चार दिन पहले सोमवार को जयप्रकाश घर पर आए थे और मैं जब इटाएं बाजार में बस पर बैठाने गया तो मुझसे वादा किया था कि चाचा अब मैं दशहरे पर छुट्टी लेकर आऊंगा तो तीन चार दिन रहूंगा।

चाचा मंगला को क्या पता था कि यह उनकी आखिरी मुलाकात हो जाएगी। चाचा का कहना है कि उन्हीं की प्रेरणा से उसने पुलिस की नौकरी करने का मन बनाया था। 

पुलिस और सेना में हैं अन्य भाई 
 शहीद दरोगा के पिता श्यामबिहारी सिंह छह भाइयों में सबसे बड़े हैं। उनके कई भाई फोर्स में तैनात हैं। अशोक सिंह पुलिस में चंदौली, दूसरे अवधविहारी सिंह, सुनील सिंह  फौज में, अशोक सिंह एवं जितेंद्र बहादुर सिंह सबसे छोटे मंगला सिंह हैं। शहीद दरोगा के सगे भाई बी पुलिस में हैं।
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गांव में मातम, नहीं जले चूल्हे  

घटना की जानकारी होते ही घर पहुंचने लगे लोग - फोटो : अमर उजाला
दरोगा के शहीद होने की सूचना के बाद बनेवरा में मातम छाया है। लोग गम में हैं। शोक में गुरुवार को आसपास के किसी भी घर में चूल्हा नहीं जला। शहीद की 90 वर्षीय दादी रामदुलारी सिंह का रो-रो कर बुरा हाल है।

वह बार-बार कह रही हैं कि हमार ललनवा कहा चल गइलन, भगवान हमय काहे नाय मरलन।  घटना की सूचना पाते ही माता-पिता सहित घर के अन्य लोग चित्रकूट के लिए रवाना हो गए हैं। घर पर वृद्ध दादी को सांत्वना देने के लिये पास पड़ोस की महिलाएं जुटी हुई थीं। 


सिपाही से बने थे दरोगा

श्यामविहारी सिंह के दो पुत्रों एवं दो पुत्रियों में शहीद दरोगा जयप्रकाश सिंह सबसे बड़े थे। उनकी प्राथमिक शिक्षा गांव में ही हुई थी। हाईस्कूल और इंटर की शिक्षा उन्होंने आदर्श इंटर कालेज से और स्नातक की पढ़ाई मडियाहूं पीजी कॉलेज से की थी।

1991 में पढ़ाई के दौरान ही वह सिपाही बन गए और 2012 में विभागीय परीक्षा पास कर दरोगा बने। वह गोरखपुर, झांसी, मऊ, वाराणसी सहित कई जिलों में तैनात रहे। गांव आने पर पिता श्यामविहारी सिंह के साथ खेती में भी हाथ बंटाते थे। उनके दोनों बेटे कोटा में रहकर सीपीएमटी की तैयारी कर रहे हैं।



 
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