गोली लगने से ग्रामीण घायल।
- फोटो : अमर उजाला।
नेमा के टोला गांव निवासी केदार चौधरी(50) बुधवार की रात खाना खाकर घर में सो रहे थे। इसी दौरान गांव के किसी व्यक्ति ने केदार के सगे भाई दीना चौधरी के मोबाइल पर फोन कर बताया कि आपके घर के पीछे चार लोग खड़े हैं और इधर-उधर झांक रहे हैं। इसके बाद दीना चौधरी ने परिवार के अन्य सदस्यों को जगाया और उन्हें लेकर बाहर निकले।
तब तीन हथियाबंद डकैत घर के पीछे की दीवार के सहारे छत पर चढ़ गए और और आंगन की जाली हटाकर नीचे घर में उतर गए। दीना अभी परिवार के सदस्यों के साथ बाहर ही थे कि बदमाशों ने हथियार के बल पर घर की महिलाओं को एक कमरे में बंद कर दिया और दूसरे कमरे में रखे बक्सा, आलमारी आदि को तोड़कर सामान समेटना शुरू कर दिया। तभी कमरे में बंद महिलाओं ने चीखना चिल्लाना शुरू कर दिया। शोर सुनकर पूरे गांव के लोग जग गए और सामान आदि तलाश रहे डकैत भी अंधेरे में छुप गए।
गांव के लोगों ने केदार व दीना के साथ लाठी-डंडे आदि लेकर घर को घेर लिया। तभी बाहर खड़े एक डकैत ने साथियों को फंसता देख अंधाधुंध फायरिंग शुरू कर दी। गांव के लोग भागकर इधर-उधर छिपते तब तक एक गोली केदार के पेट में जा लगी। गांव वालों ने उन्हें तत्काल सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र सिकंदरपुर पहुंचाया। वहां से उन्हें जिला अस्पताल और फिर वाराणसी के लिए रेफर कर दिया गया।
उधर, गांव में घंटों गांव के लोगों और डकैतों में लुकाछिपी का खेल चलता रहा। गांव वाले जब भी डकैतों को घेरने का प्रयास करते वे फायरिंग शुरू कर दे रहे थे। इस बीच गोलियां खत्म होने के बाद एक डकैत गांव वालों के हत्थे चढ़ गया। इसके बाद गांव के लोगों ने उसकी जमकर पिटाई की।
इस बीच मामले की जानकारी पाकर स्थानीय थाने की पुलिस गांव में पहुंची और ग्रामीणों द्वारा पकड़े गए डकैत को अपने कब्जे में लिया। पुलिस ने उसकी निशानदेही पर गांव में ही छुपे उसके दो अन्य साथियों को भी पकड़ने में सफलता प्राप्त किया। इस बीच अंधेरे का फायदा उठाकर डकैतों के अन्य साथी भागने में सफल रहे।
बलिया के पुलिस अधीक्षक देवेंद्रनाथ ने बताया कि गोली से घायल युवक को उपचार के लिए वाराणसी भेजा गया है। पकड़े गए तीनों बदमाशों से पूछताछ की जा रही है, ताकि उनके अन्य साथियों की पहचान कर उन्हें पकड़ा जा सके। पुलिस को मामले में त्वरित कार्रवाई का निर्देश दिया गया है।