पंचायत चुनाव में खपाने के लिए पंजाब और हरियाणा से मंगाई करीब 30 लाख रुपये की अंग्रेजी शराब एसटीएफ ने बरामद की है।
गुरुवार की रात सारनाथ केे चंद्रा चौमुहानी से शराब की इस खेप के साथ दो आरोपियों को भी दबोचा गया। पिकप में लादकर यह शराब गाजीपुर ले जाई जा रही थी।
गिरफ्तार आरोपियों में एक अवकाश प्राप्त सैन्यकर्मी भी शामिल है। उसने सेना की वर्दी भी पहन रखी थी। उधर, मऊ में पिपरीडीह रेलवे क्रांसिंग के समीप से पुलिस ने गुरुवार की रात नौ पेटी अवैध शराब बरामद की।
शराब के साथ पुलिस ने दो आरोपियों को भी गिरफ्तार किया, इनमें से एक प्रधानी का चुनाव लड़ने का इच्छुक है।
एसटीएफ की वाराणसी इकाई के इंस्पेक्टर शैलेश सिंह और उप निरीक्षक सुनील कुमार वर्मा को मुखबिर के जरिए सूचना मिली थी कि गुरुवार की रात पिकप से अवैध शराब की खेप गाजीपुर ले जाई जाएगी।
इस पर गुरुवार देर रात चंद्रा चौराहे पर घेराबंदी की। एक पिकअप को चेक किया तो चालक ने भागने की कोशिश की लेकिन उसे घेरकर रोक लिया गया।
चेक करने पर उसमें से 402 पेटी (4824 बोतल) अंग्रेजी शराब बरामद की गई। बाजार में इसकी कीमत करीब 30 लाख रुपये बताई गई है।
मौके से मंडुवाडीह थाना क्षेत्र के कंदवा निवासी अवकाश प्राप्त सैन्यकर्मी मिश्री प्रसाद और भेलूपुर के खोजवां निवासी रामप्यारे गिरी को गिरफ्तार किया गया।
दोनों से पूछताछ में पता चला कि वह पंजाब और चंडीगढ़ से शराब खरीदते थे। वहां की शराब यूपी की अपेक्षा सस्ती है।
यूपी में प्रतिबंधित होने के चलते वह चोरी-छिपे शराब लाते थे और आर्डर के मुताबिक वाराणसी, गाजीपुर, चंदौली, देवरिया समेत शराब के कई बड़े कारोबारियों को सप्लाई करते थे।
कारोबारी लेबल बदलकर शराब को यहां के तय रेट के आधार पर बेचते थे। पूछताछ में उन्होंने एसटीएफ को बताया कि ग्राम पंचायत चुनाव और बिहार विधानसभा चुनाव की वजह से पिछले दो महीने से शराब की मांग बढ़ी है।
इस बार पंचायत चुनाव में खपाने के उद्देश्य से शराब मंगाई गई थी। पता चला कि गाजीपुर के चार शराब कारोबारियों समेत करीब सात लोगों ने आर्डर दिए थे।
पुलिस उनकी भूमिका की भी जांच कर रही है। इस गोरखधंधे से जुड़े पूर्वांचल के कई लोगों के नाम सामने आए हैं। एसटीएफ उनकी पड़ताल में जुटी हुई है।
अवैध शराब का गोरखधंधा चार साल से आबकारी विभाग और पुलिस की नाक के नीचे चल रहा था, लेकिन आबकारी विभाग को भनक तक नहीं लगी।