वाराणसी। शहर की आधी से ज्यादा आबादी फ्लोराइड, आर्सेनिक, लौह तत्व और नाइट्रेट सहित अन्य लवण एवं भारी धातुओं के मिश्रण वाला पानी पीने को मजबूर है। भले ही जल आपूर्ति करने वाली एजेंसियां इस सच को नकारने में जुटी हो, मगर शहर में सक्रिय आरओ कंपनियों की जांच में यह तथ्य सामने आए हैं। सेहत के लिए खतरनाक रासायनिक तत्वों वाले दूषित पानी की उपलब्धता सबसे ज्यादा शहरी क्षेत्र में है। लंका क्षेत्र में आर्सेनिक के साथ पानी में आयरन की ज्यादा मात्रा सेहत के लिए खतरे की घंटी है।
शहर में ज्यादातर क्षेत्रों में आपूर्ति होने वाला पेयजल बीमारियों का कारक बन रहा है। नगर निगम क्षेत्र में पाइप लाइन से पहुंचने वाले पेयजल में टीडीएस (घुलित ठोस पदार्थ) की मात्रा काफी ज्यादा है। शहर में आपूर्ति किए जाने वाले पेयजल में टीडीएस की मात्रा मानक से काफी ज्यादा है। चौक, जैतपुरा, गायघाट, अस्सी, भदैनी, खोजवां, लक्सा, कमच्छा, अलईपुर, नगवां, कोनिया, पीलीकोठी, बड़ी पियरी, वरुणा पार सहित अन्य इलाकों में पानी में टीडीएस की मात्रा एक हजार से पांच हजार तक है। पानी में आर्सेनिक की मात्रा ज्यादा होने के चलते हड्डी से लेकर आंत तक प्रभावित होने का खतरा बना हुआ है। विश्व स्वास्थ्य संगठन के अनुसार 100 से 150 टीडीएस का पानी अच्छा माना जाता है। 900 से ज्यादा टीडीएस स्वास्थ्य को प्रभावित करता है। आरओ कंपनी से जुड़े बीके मिश्रा बताते हैं कि शहर के ज्यादातर क्षेत्रों के पानी में टीडीएस की मात्रा एक हजार से पांच हजार तक है। सबसे खराब पानी लंका क्षेत्र का है, यहां पानी में आयरन की मात्रा ज्यादा है।