बलिया। स्वास्थ्य महकमा आदेश के बाद भी अपने एक लिपिक पर एफआईआर नहीं करा सका है। एक मामले में निलंबन की संस्तुति के बाद वह आजमगढ़ में अटैच किया जा चुका है। लेकिन उसने आज तक चार्ज नहीं दिया है। लपिक के विरूद्ध पांच अगस्त की बैठक में राज्यमंत्री उपेंद्र तिवारी व डीएम सुरेंद्र विक्रम ने चार्ज न देने पर एफआईआर दर्ज कराने का निर्देश सीएमओ को दिया था। लेकिन मंत्री और डीएम का आदेश भी महकमा पर बेअसर साबित हो रहा है।
स्वास्थ्य विभाग में फर्जी नियुक्तियों की जांच चल ही रही थी कि उप सचिव स्वास्थ्य विभाग संजय कुमार मिश्रा ने चिकित्सा एवं स्वास्थ्य सेवाएं के निदेशक (प्रशासन) को दो जून 2017 को जारी पत्र में बलिया मुख्य चिकित्साधिकारी कार्यालय में तैनात लिपिक दयाशंकर वर्मा को निलंबित कर उनके विरूद्ध कार्रवाई करने की संस्तुति की थी। यह कार्रवाई उप सचिव ने रेवती निवासी मकसूद आलम पुत्र स्व. सुलेमान अंसारी के शिकायती पत्र के आधार पर किया था। तत्पश्चात शासन द्वारा लिपिक को आजमगढ़ में अटैच कर दिया गया था। लेकिन दो माह बीत जाने के बाद भी लिपिक ने अब तक अपना चार्ज नहीं दिया। इसकी जानकारी जब राज्यमंत्री उपेंद्र तिवारी व डीएम को हुई तो उन्होंने पांच अगस्त की बैठक में दो दिन के अंदर चार्ज हस्तानांतरण कराने या एफआईआर दर्ज कराने का आदेश दिया था। लेकिन एक सप्ताह बीत जाने के बाद भी लिपिक से चार्ज हस्तानांतरण नहीं किया गया और नहीं उसके विरूद्ध एफआईआर दर्ज कराया गया।
इस बाबत प्रभारी मुख्य चिकित्साधिकारी एके तिवारी ने बताया कि गुरुवार को लिपिक से आधा चार्ज ले लिया गया है। जल्द ही बाकी चार्ज भी ले लिया जाएगा। बताया कि चार्ज लेने और बांटने में समय लगता है। इस लिए थोड़ा विलंब हुआ है।
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चार्ज के अभाव में राष्ट्रीय कृमि दिवस रहा प्रभावित
बलिया। स्वास्थ्य विभाग का चर्चित लिपिक दयाशंकर वर्मा द्वारा चार्ज नहीं देने के कारण राष्ट्रीय कृमि दिवस का टेंडर नहीं हो सका। जिसके चलते राष्ट्रीय कृमि दिवस प्रभावित हो गई। इसकी जानकारी होने पर जिलाधिकारी ने सीएमओ समेत अन्य अधिकारियों को गुरुवार की शाम बैठक की और प्रभावित होने का कारण पूछ फटकार लगाई। इस बाबत प्रभारी सीएमओ एके तिवारी ने बताया कि राष्ट्रीय कृमि दिवस सफलता पूर्वक संपन्न हुआ। डीएम साहब ने बैनर छोटा होने पर नाराजगी जताई थी। जिन्हें बताया गया कि यहां से बैनर नहीं बनाया गया है, बल्कि बैनर शासन से आया हैं। जिसके बाद वह संतुष्ट हुए। इस प्रकार का आरोप बेबुनियाद है।