वाराणसी। सराय गोवर्धन मोहल्ले में कृष्णकांत उपाध्याय उर्फ ‘बड़का बच्चा’ और उनकी पत्नी ममता की हत्या के बाद उनके बेटे सुमित ने एसएसपी के सामने पुलिस की लापरवाही को जी भर कर कोसा। सुमित ने कहा- यदि लल्लापुरा चौकी इंचार्ज उसकी बात मानकर आरोपी चाचा और उसके करीबियों पर कार्रवाई की होती तो माता-पिता की हत्या न होती। चौकी इंचार्ज की लापरवाही की वजह से ही हत्या हुई है। एसएसपी ने सुमित को ढांढस बंधाया, लेकिन उसका बिलखना देख सभी की हिम्मत जवाब दे जा रही थी।
सरायगोवर्धन निवासी कृष्णकांत और उनकी पत्नी ममता की गतिविधियों की सात दिन से रेकी की जा रही थी। सुमित ने बताया कि दो दिन पहले घाट पर भी उसके पिता को मारने की कोशिश की गई, लेकिन सफ लता नहीं मिली। इसके बाद से आरोपी चाचा घर पर ताला लगाकर परिवार के साथ कहीं चला गया था। हत्या के चश्मदीद सुमित ने बताया कि वह और पिताजी सुबह घाट जाने के लिए घर से निकलने वाले थे। जैसे ही गली में आए तो पीछे से कुछ लोग आ गए। मुड़कर देखा तो चाचा, चाची, उसका बेटा और अन्य लोग थे। यहां आरोपियों ने पिस्टल लोड की। वह पिताजी को नीचे छोड़ मम्मी को आगाह करने आया, तब तक गोली चलने की आवाज सुनाई दी। पिताजी को गोली मारने के बाद सभी ऊपर आए और मम्मी को भी गोली मार दी। चापड़ से भी वार किया।
सुमित ने कहा कि उसने शुक्रवार शाम क्षेत्र में घूम रही चाची के हाथ में असलहा देखा था। चाची ने उसे धमकी भी दी थी कि वह सबको मार देंगी। इसे लेकर उसने लल्लापुरा चौकी इंचार्ज राजकुमार वर्मा को फ ोन किया और बताया कि चाची के झोले में असलहा है और वह मम्मी-पापा को मार देंगी। चौकी इंचार्ज ने हमारी बात नहीं सुनी और मौके पर होने के बावजूद झोला चेक नहीं किया। यदि वह शिकायत को गंभीरता से लेते तो मम्मी-पापा की हत्या न होती। कृष्णकांत के दो बेटे सुमित उर्फ पवन (18) और विनीत (15) हैं। वहीं राजेंद्र के एक बेटा और दो बेटियां हैं।
लौटकर आए और दोबारा मारी गोली
कृष्णकांत को गोली मारने के बाद हत्यारे छत पर गए और ममता को निशाना बनाया। लौटकर आने के बाद नकाबपोश दो हत्यारे भागने के लिए स्कूटी पर बैठने लगे तो एक की नजर तड़पते कृष्णकांत पर पड़ी। उनमें से एक लौटा और फिर से कृष्णकांत पर फायर किया। हमलावरों ने घर में लगे सीसी कैमरे भी तोड़ दिए।
रिवॉल्वर जब्त न होती तो करते बदमाशों का मुकाबला
सुमित ने बताया कि पापा के पास लाइसेंसी रिवॉल्वर थी। चाचा द्वारा बार-बार फ र्जी मुकदमे दर्ज कराए जाने के कारण रिवॉल्वर जब्त कर ली गई थी। यदि रिवॉल्वर पास होती तो वह बदमाशों का मुकाबला कर जान बचा लेते।
हम अनाथ हो गए, अब हम किसके सहारे रहेंगे
कृष्णकांत के दोनों बेटों सुमित और विनीत की हालत देख मोहल्ले के लोग भी गमगीन दिखे। सुमित बार-बार यही कह रहा था कि हम और हमारा भाई अनाथ हो गए। अब हम किसके सहारे रहेंगे? हमारे मां-बाप के साथ ऐसा क्यों हुआ...? क्यों पुलिस ने समय रहते कार्रवाई नहीं की...? अब हमें और हमारे भाई को भी चाचा मार डालेंगे। जब ननिहाल से मामा सहित अन्य लोग आए तो वह उनसे लिपट कर बिलखता रहा।
अरे, राधे गुरु के लइका ई का कइलन महादेव....
कृष्णकांत और राजेंद्र के पिता राधेश्याम उपाध्याय उर्फ राधे गुरु अपने समय के जाने माने कर्मकांडी ब्राह्मण थे। जब वारदात की सूचना पिशाचमोचन कुंड के अन्य कर्मकांड कराने वालों को मिली तो सभी सन्न रह गए। उनका कहना था कि अरे महादेव, राधे गुरु के लइका ई का कइलन...! उन्होंने बताया कि सात-आठ साल पहले राधे गुरु की मौत हुई थी। इसके बाद गद्दी और जजमानों को अपने पाले में करने के लिए उनके बेटों में विवाद होने लगा। मारपीट के साथ ही गोली भी चली। चेतगंज पुलिस ने 2015 में दोनों की गद्दी के बीच दीवार बनवा दी। हर बार यही लगा कि अब मामला सुलझ जाएगा, लेकिन यह किसी ने नहीं सोचा था कि छोटा भाई अपने बड़े भाई और भाभी की हत्या कर देगा।
दो माह पहले भी आरोपियों ने किया था जानलेवा हमला
कृष्णकांत और उनके परिवार पर 14 जुलाई को पिशाचमोचन कुंड पर राजेंद्र, उसकी पत्नी और अन्य लोगों ने त्रिशूल व अन्य धारदार हथियारों से हमला किया था। सुमित ने बताया कि तब पापा ने सिगरा थाने में शिकायत की थी। पुलिस ने कार्रवाई के बजाय पिताजी को ही परेशान करना शुरू कर दिया था। इस वजह से राजेंद्र और उसके करीबियों के हौसले बुलंद थे। सुमित ने बताया कि मुकदमे दर्ज होते रहे और सिगरा व चेतगंज थाने की पुलिस मूकदर्शक बनी रही। नतीजतन उसका परिवार बिखर गया।
संपत्ति के लिए पहले भी हुईं वारदात
जिले में पहले भी जमीन विवाद, रुपये लूटने सहित अन्य कारणों से हत्याएं हुई हैं। जून में रोहनिया थाना के जगतपुर में हिस्ट्रीशीटर और उसकी करीबी महिला की गोली मार कर हत्या कर दी गई थी। अक्तूबर 2018 में छावनी क्षेत्र स्थित जेएचवी मॉल में अंधाधुंध फ ायरिंग कर दो लोगों की हत्या की गई थी और दो लोगों की हत्या का प्रयास किया गया था। अगस्त 2018 में चौबेपुर थाना के मिल्कोपुर गांव में पिता-पुत्र को बम से उड़ा कर हत्या की गई थी। मई 2018 में सारनाथ थाना के रजनहिया स्थित शराब ठेके के सामने चखना बेचने वाले और उसके भांजे की गोली मार कर हत्या की गई थी। मई 2017 में महमूरगंज क्षेत्र की गिरि नगर कॉलोनी में सास-बहू की धारदार हथियार से हत्या की गई थी। मार्च 2016 में भेलूपुर क्षेत्र निवासी दो युवकों को अगवा कर उनकी हत्या कर दी गई थी।
ताबड़तोड़ हो रहीं वारदात, हाथ पर हाथ धरे बैठी पुलिस
हाल के दिनों में गंभीर वारदात तेजी से बढ़ी हैं, लेकिन पुलिस हाथ पर हाथ धरे बैठी है। बीती तीन सितंबर को मढ़वा निवासी दिव्यांग दुकानदार दिलीप पटेल पर अंधाधुंध फ ायरिंग कर हत्या कर दी गई थी। इससे पहले 28 अगस्त की रात सथवा के पूर्व प्रधान का अपहरण कर 50 लाख रुपये की रंगदारी मांगी गई थी। आठ सितंबर को सारनाथ क्षेत्र में 70 वर्षीय वृद्धा नारंगी देवी की गोली मार कर हत्या कर दी गई थी। 22 जुलाई को पहडि़या क्षेत्र में पाइप कारोबारी की हत्या कर बदमाशों ने पांच लाख रुपये लूट लिए थे। इसके अलावा लूट, छिनैती, उचकागीरी और चोरी के कई ऐसे भी मामले हैं जिनका खुलासा करना तो दूर पुलिस बदमाशों को चिह्नित भी नहीं कर सकी है।