वाराणसी। चीनी उत्पादों के बहिष्कार के बीच क्राफ्ट पेपर (गत्ता) का निर्यात चीन को किया जा रहा है। इससे क्राफ्ट पेपर की कमी हो गई है। पेपर मिलों ने कार्टेल बनाकर वेस्ट पेपर की कमी बताते हुए क्राफ्ट पेपर के दामों में अप्रत्याशित वृद्धि कर दी है। 4-5 माह में क्राफ्ट पेपर के दाम लगभग 40 से 45 फीसदी बढ़ गए हैं।
उत्तर प्रदेश कारुगेटेड बॉक्स मैन्युफैक्चरस एसोसिएशन वाराणसी चैप्टर के पदाधिकारियों ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को पत्र भेजकर मूल्यवृद्धि पर लगाम लगाने और क्राफ्ट पेपर के चीन निर्यात को रोकने की मांग की है। वहीं, केंद्र सरकार से आग्रह किया है कि क्राफ्ट पेपर एचएसएन 4706, 4808 एवं 4805 के निर्यात पर प्रतिबंध लगाकर देश में पुरानी दरों पर इसकी उपलब्धता सुनिश्चित की जाए।
वाराणसी चैप्टर अध्यक्ष राजेश भाटिया ने बताया कि कारुगेटेड बॉक्स उद्योग में 90 फीसदी से ज्यादा इकाइयां सूक्ष्म श्रेणी की है। मूल्यवृद्धि ने इस उद्योग की कमर तोड़ दी है। सूक्ष्म श्रेणी की यह सभी एमएसएमई इकाइयां वर्तमान में क्राफ्ट पेपर की दरों की अप्रत्याशित वृद्धि के कारण कार्यशील पूंजी के संकट से जूझ रही हैं। चीन को निर्यात होने वाले क्राफ्ट पेपर को प्रतिबंधित किया जाए।
उन्होंने बताया कि देश में निर्मित होने वाली लगभग सभी वस्तुएं जैसे एफएमसीजी प्रोडक्ट, दवाई, ऑटोमोबाइल पार्ट्स, मिल्क एंड डेयरी प्रोडक्ट इलेक्ट्रॉनिक गुड्स, रेडीमेड गारमेंट, टेक्सटाइल, फुटवियर फ्रूट एंड वेजिटेबल ऑनलाइन रिटेल कारोबार एवं निर्यात आदि सभी क्राफ्ट पेपर की दरों में हुई वृद्धि से प्रभावित हैं इससे मेक इन इंडिया एवं आत्मनिर्भर अभियान को भी धक्का लगा है।