इस पर मुकदमे को हाईकोर्ट के आदेश पर गाजियाबाद स्थानांतरित किया गया था। उस समय से गाजियाबाद के डासना जेल में वलीउल्लाह निरुद्ध है। इस बम धमाके में वाराणसी पुलिस ने संकट मोचन मंदिर मामले में 52 गवाह, कैंट स्टेशन धमाके में 53 और दशाश्वमेध घाट केस में 42 गवाह बनाए थे।
आतंकी संगठन हूजी से जुडे़ वलीउल्लाह के पास से उस समय एके-47, आरडीएक्स, बड़ी संख्या में प्रेशर कुकर, आईईडी व बम बनाने का सामान बरामद हुआ था। जिस समय प्रेशर कुकर से ब्लास्ट किया था, उस समय संकट मोचन मंदिर में भक्तों की जुटान अधिक थी। सात लोगों के चीथडे़ उड़ गए थे।
कोतवाली निवासी संतोष साहनी का पैर उड़ गया था, वहीं नगवा स्थित सुभाष द्विवेदी के पिता की मौत हो गई थी। संतोष साहनी उस मंजर को याद कर आज भी सिहर उठते हैं। उधर, कैंट स्टेशन स्थित पर्यटक बूथ के पास बम धमाके में 11 यात्रियों की मौत हो गई थी और 50 से अधिक लोग घायल हुए थे।
उस समय पास में ही होटल का संचालन करने वाले अजय प्रताप सिंह बॉबी भी दृश्य देख दहल उठे थे। वलीउल्लाह की गिरफ्तारी के बाद मुस्तकीम, जकारिया और शमीम का नाम बम धमाके की घटना में सामने आया था। हालांकि पुलिस इनकी गिरफ्तारी आज तक नहीं कर सकी।