ज्ञानवापी परिसर के बाहर तैनात सुरक्षाकर्मी
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जिला जज डॉ. अजय कृष्ण विश्वेश की अदालत ने शनिवार को ज्ञानवापी परिसर स्थित सील वजूखाने और अधिवक्ता आयुक्त के सर्वे में मिली शिवलिंग जैसी आकृति के भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (एएसआई) से सर्वे कराने की अर्जी खारिज कर दी। जिला जज ने ट्रायल जज, उच्च न्यायालय और सर्वोच्च न्यायालय के पहले पारित आदेशों का हवाला दिया और कहा कि वजूखाने और शिवलिंग जैसी आकृति का सर्वे का आदेश सर्वोच्च न्यायालय के आदेश का उल्लंघन हो सकता है।
जिला जज ने आदेश में कहा कि सर्वोच्च न्यायालय के आदेश के अवलोकन से स्पष्ट है कि जिस क्षेत्र में शिवलिंग पाया गया, उसे संरक्षित करने का आदेश दिया गया था। न्यायालय ने 21 जुलाई 2023 को इस क्षेत्र को सर्वे से बाहर रखा है। विधिवत संरक्षित क्षेत्र का मेरी राय में सर्वे नहीं किया जाना चाहिए, क्योंकि यह सर्वोच्च न्यायालय के आदेश का उल्लंघन हो सकता है। ज्ञानवापी स्थित शृंगार गौरी के नियमित दर्शन की मांग करने वाली राखी सिंह ने वजूखाने और शिवलिंग जैसी आकृति का एएसआई सर्वे कराने की अर्जी दी थी। सभी पक्षों की दलीलों को सुनने के बाद जिला जज ने आदेश की पत्रावली सुरक्षित रख ली थी। शनिवार की देर शाम जारी आदेश में सर्वे कराने की अर्जी खारिज कर दी गई।
जिला जज ने 17 मई 2022 के आदेश के अध्ययन का भी हवाला दिया। जिसमें उच्चतम न्यायालय ने कहा है कि किसी भी तरह से मुसलमानों की मस्जिद तक पहुंच या नमाज और धार्मिक अनुष्ठानों के लिए मस्जिद के उपयोग पर रोक या बाधा नहीं डालेगा। जिला मजिस्ट्रेट को इस क्षेत्र को विधिवत संरक्षित करने का आदेश दिया गया है। जिला जज के आदेश से स्पष्ट हो गया है कि शिवलिंग वाला क्षेत्र सील नहीं बल्कि संरक्षित है। हम इस आदेश के खिलाफ उच्च न्यायालय में अपील करेंगे।