वहां पहले की तरह पूजा-पाठ की अनुमति दी जाए। इसके बाद जिला जज की अदालत में स्थानांतरण प्रार्थना पत्र दिया गया। कहा गया कि ज्ञानवापी से जुड़े अन्य सभी मामलों की सुनवाई जिला जज की अदालत में चल रही है। ऐसे में व्यासजी के तहखाने से संबंधित वाद की सुनवाई भी जिला जज की अदालत में ही की जाए।
मसाजिद कमेटी ने शैलेंद्र कुमार पाठक व्यास के अनुरोध पर आपत्ति जताई थी। कमेटी का कहना था कि वाद गलत तथ्यों के साथ दाखिल किया गया है। स्थानांतरण प्रार्थना पत्र दुर्भावनावश दायर किया गया है। एक अन्य पक्षकार काशी विश्वनाथ मंदिर ट्रस्ट की ओर से कहा गया था कि स्थानांतरण प्रार्थना पत्र में वाद संख्या और वर्ष का उल्लेख नहीं किया गया है। ऐसे में स्थानांतरण प्रार्थना पत्र अपूर्ण और त्रुटिपूर्ण होने के कारण स्वीकार होने योग्य नहीं है। अदालत ने मसाजिद कमेटी और विश्वनाथ मंदिर ट्रस्ट की आपत्ति खारिज कर दी।
शैलेंद्र कुमार पाठक व्यास की ओर से अदालत में अधिवक्ता विष्णुशंकर जैन, सुभाष नंदन चतुर्वेदी और सुधीर त्रिपाठी ने पक्ष रखा। वहीं, मसाजिद कमेटी की ओर से अदालत में अधिवक्ता मुमताज अहमद, एखलाक अहमद, रईस अहमद और तौहीद खाना ने पक्ष रखा। वहीं, विश्वनाथ मंदिर ट्रस्ट की ओर से अधिवक्ता रविकांत पांडेय ने पक्ष रखा।
जिला जज की अदालत ने कहा कि उनकी अदालत में मूल वाद संख्या-18/2022 विचाराधीन है। उस वाद में सेटलमेंट प्लाट नंबर-9130 के तथाकथित ज्ञानवापी परिसर में स्थित मां शृंगार गौरी, भगवान गणेश व अन्य देवी-देवताओं की पूजा करने के संबंध में अनुतोष मांगा गया है। शैलेंद्र कुमार पाठक व्यास के वाद में सेटलमेंट प्लाट संख्या-9130 के तथाकथित ज्ञानवापी परिसर में स्थित तहखाना के संबंध में पूजा करने का अधिकार और पुजारी के रूप में कार्य करने का अधिकार मांगा गया है। इसलिए न्याय हित में यह उचित होगा कि शैलेंद्र कुमार पाठक व्यास के वाद को सिविल जज सीनियर डिवीजन की अदालत से स्थानांतरित कर दिया जाए।