उच्च शिक्षण संस्थानों में पढ़ाई समेत अन्य मानसिक तनाव के कारण छात्र अपनी जिंदगी को समाप्त कर रहे हैं। छात्रों के बढ़ते तनाव को दूर करने के मकसद से आईआईटी बॉम्बे में दूसरा छात्र कल्याण सम्मेलन सोमवार को समाप्त हो गया है। इसमें आईआईटी, केंद्रीय विश्वविद्यालय, एनआईटी समेत 90 से अधिक उच्च शिक्षण संस्थान शामिल हुए। इसमें छात्रों की नियमित काउंसलिंग, समावेशी परिसर और संबंधित अधिकारियों पर जवाबदेही तय करने पर फैसला हुआ है।
आईआईटी बॉम्बे में आयोजित कार्यक्रम के समापन सत्र में केंद्र सरकार की संयुक्त सचिव रीना सोनोवाल कौली ने कहा, किशोर और युवा भारत के जनसांख्यिकीय लाभांश की रीढ़ हैं। फिर भी उनकी सहनशक्ति को अकादमिक दबावों, सामाजिक अलगाव और डिजिटल प्रभावों से लगातार चुनौती मिल रही है। राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020, राष्ट्रीय आत्महत्या रोकथाम रणनीति 2021, और उसके बाद के यूजीसी और शिक्षा मंत्रालय के दिशानिर्देशों के तहत सबको मिलकर काम करना होगा। उच्च शिक्षण संस्थानों को परामर्श सेवाओं (काउंसलिंग सत्र), समावेशी परिसर और जवाबदेही तंत्रों को तत्काल शुरू करने की जरूरत है। छात्रों की दिक्कतों को समझते हुए उनको परामर्श देना होगा। उससे पहले,उद्घाटन सत्र में सरकार के उच्च शिक्षा सचिव विनीत जोशी ने छात्र हित में ठोस रणनीति बनाने का निर्देश दिया। उन्होंने कहा, बच्चों की परेशानियों को नजरअदांज नहीं किया जा सकता है। पढ़ाई के साथ उनको मानसिक रूप से तैयार करने के लिए अच्छा माहौल देना जरूरी है, ताकि वे अपनी दिक्कतों पर अपने शिक्षकों या वेलनेस सेंटर में बता सकें। छात्रों की सुरक्षा और अच्छा माहौल मुहैया करवाना शिक्षण संस्थानों की जिम्मेदारी है। मानसिक कल्याण न केवल एक सामाजिक आवश्यकता है, बल्कि एक आर्थिक जरूरत भी है। आर्थिक सर्वेक्षण में भी राष्ट्रीय उत्पादकता को बनाए रखने के लिए एक स्वस्थ छात्र आबादी की आवश्यकता पर जोर दिया गया है। कार्यक्रम में वॉकथॉन भी आयोजित हुई, जिसमें शारीरिक और मानसिक कल्याण का संदेश दिया गया। छात्रों और शिक्षकों की अलग-अलग कार्यशाला भी आयोजित हुईं। जो जीवन कौशल, सहकर्मी सहायता, परामर्श योग्यता और डिजिटल कल्याण पर केंद्रित थीं।