ग्रामीणों का कहना था कि सूचना देने के बाद भी 108 नंबर की सरकारी एंबुलेंस मौके पर नहीं पहुंची और न पुलिस घटनास्थल पर पहुंची। तड़पते हुए दोनों युवकों की मौत हो गई। ग्रामीणों का कहना था कि अगर एंबुलेंस सूचना देने के साथ ही आ गई होती तो शायद दोनों युवकों की जान बच जाती। मौके पर पुलिस के साथ पहुंचे मिर्जामुराद थाना प्रभारी एनके सिंह ने शव को कब्जे में लेने का प्रयास किया तो ग्रामीणों ने पुलिस का विरोध किया और जिलाधिकारी को बुलाने की मांग की।
ग्रामीणों का कहना था कि मौके पर जिलाधिकारी जब तक नहीं आएंगे और परिजनों को 50 लाख रुपये के मुआवजा की घोषणा नहीं करेंगे तब तक जाम नहीं समाप्त किया जाएगा। मौके पर पहुंचे क्षेत्राधिकारी बड़ागांव और तहसीलदार राजातालाब के समझाने पर लगभग साढ़े तीन घंटे बाद ग्रामीण माने। तब जाकर शव पोस्टमार्टम के लिए भेजा गया। उधर, आरोपी चालक को पिकअप के साथ पकड़ लिया गया है। पुलिस के अनुसार, पिकअप भी किसी शादी से ही सामान लाद कर जा रही थी।
आधे घंटे तक दोनों तड़पते रहे
हादसे के बाद घटनास्थल पर सबसे पहुंचे ग्रामीणों ने बताया कि पिकअप की टक्कर के बाद दोनों युवक जिंदा थे और तड़प रहे थे। उस समय उन लोगों के पास कोई ऐसा साधन नहीं था कि जिससे वह दोनों युवकों को अस्पताल पहुंचा पाते। उन्होंने पुलिस और सरकारी एंबुलेंस सभी को फोन किया लेकिन कोई भी समय से नहीं आया। देखते ही देखते दोनों युवकों की सड़क पर तड़प कर मौत हो गई। ग्रामीणों के अनुसार यह बेहद ही दु:खद घटना है। सरकारी कर्मियों को अपने कामकाज के ढर्रे में सुधार लाना चाहिए।