शुभम को कफ सिरप की बारीकियां बताने और बोगस फर्मों का आइडिया देने वाला प्रशांत ही है। शुभम ने सपा नेता अमित की मुलाकात प्रशांत से कराई। प्रशांत ने सबसे पहले अमित यादव को दवा फर्म पंजीकृत करवाया। इसके बाद अमित ने वाराणसी और चंदौली में बोगस फर्मों का जाल बिछाया। अमित ने जीएल सर्जिकल के अलावा डमी फर्म पूर्णा फार्मा पंजीकृत कराया।
2024 में पूर्णा फार्मा पर सिर्फ कागजों में कफ सिरप की खरीद बिक्री दिखाई गई। अमित यादव ने अपने प्रभाव और युवाओं की टीम के बदौलत वाराणसी, चंदौली में बोगस फर्म खुलवाए। साथ रहने वाले लड़कों के नाम से भी फर्म पंजीकृत कराया। 50 हजार से एक लाख रुपये महीने तक लड़कों को देता रहा।
एसटीएफ के अनुसार अमित के साथ जुड़कर कफ सिरप का काम करने वाले 10 युवकों की पहचान की गई है। इसमें चंदौली के भी युवक हैं। ड्रग इंस्पेक्टर जुनाब अली ने प्रशांत उपाध्याय की फर्म राधिका और राजेंद्र इंटरप्राइजेज के खिलाफ कोतवाली में प्राथमिकी दर्ज कराई है। एसआईटी की टीम अभी तक प्रशांत उपाध्याय को गिरफ्तार नहीं कर सकी है।
सपा नेता अमित यादव के जेल जाने के बाद उसके साथ हर समय रहने वाले करीबी भूमिगत हो गए। इसमें कुछ व्यापारी भी शामिल हैं। सभी ने अपने-अपने नंबर बंद कर लिए और घर भी छोड़ चुके हैं। कुछ युवकों की संलिप्तता कफ सिरप में एसटीएफ को मिली है। चार अन्य युवकों की गिरफ्तारी तय मानी जा रही है।