बेमौसम बारिश नेे गेहूं और जौ के अलावा दलहनी-तिलहनी फसलों को जबरदस्त नुकसान पहुंचाया है। 40 से 50 फीसदी उपज खेतों में ही नष्ट हो गई। कृषि विभाग के सर्वे में अब तक ऐसे ही भयावह आंकड़े सामने आए हैं। जिले के दलहनी और तिलहनी फसलों के किसान भारी नुकसान से बेहाल हैं।
मुनाफे की आस में हजारों की लागत लगाई। दिन-रात मेहनत की लेकिन मौसम की मार ने सब बरबाद कर दिया। तकरीबन 50 करोड़ रुपये की दलहनी-तिलहनी फसलें खेत-खलिहानों में ही नष्ट हो गईं। जबकि 1 अरब 23 करोड़ 25 लाख रुपये से अधिक का नुकसान गेहूं की फसल का हुआ। फसलों की बरबादी के कारण आटा-दाल और सरसों तेल की कीमतें आने वाले दिनों में आम परिवारों को और रुलाएंगी।
कृषि विभाग के अनुसार जिले में करीब छह हजार हेक्टेयर में दलहनी और तिलहनी फसल की खेती की गई थी। इनमें 1922 हेक्टेयर चना, 2938 हेक्टेयर मटर, 247 हेक्टेयर मसूर और 825 हेक्टयर में सरसों की बोवाई हुई थी। फरवरी से लेकर अब तक हुई बारिश में दलहनी और तिलहनी फसलों की खेती को जबरदस्त नुकसान पहुंचा।
कृषि विभाग की रिपोर्ट के मुताबिक छह हजार हेक्टेयर मतलब 24 हजार बीघा दलहन-तिलहन की फसल में 40 से 50 फीसदी फसल बिगड़े मौसम से बरबाद हुई। किसानों के मुताबिक एक बीघा दलहन-तिलहन की खेती में कम से कम 40 हजार रुपये निकल जाते हैं। इस तरह, करीब 12 हजार बीघा फसल नष्ट मानी जाए तो नुकसान का आंकड़ा लगभग 50 करोड़ पहुंच जाता है।