प्लेग और हैजा जैसी महामारी भी हमने झेली है। हर काल और परिस्थिति में यह शहर कभी शांत नहीं रहा। छह सौ साल में भी सड़कों पर रौनक और गलियों में उत्साह बरकरार रहा है। हमने संयम और सौहार्द कभी भी नहीं छोड़ा। प्रेम, भाईचारा और उत्सवधर्मिता हमारी संस्कृति रही है। इसके बूते ही हमने हर चुनौती का सामना किया है। मौजूदा वक्त संकट का है, लेकिन हमें हिम्मत नहीं हारनी है। कोरोना के संकट को भी हम हराएंगे। धैर्य और संयम की परीक्षा में कुछ दिन और डटे रहें। इसके बाद फिर से सुनहरा भविष्य हमारा होगा।
शर्की काल में जौनपुर को मिली नई पहचान
शहर के रासमंडल स्थित हिंदी भवन के अध्यक्ष और लेखक अजय सिंह बताते हैं कि जौनपुर का समृद्ध इतिहास रहा है। तुगलक से लेकर मुगल तक यहां की कला, संस्कृति के दीवाने रहे हैं। आधुनिक भारत में भी यहां संगीत, साहित्य और कला का खूब विकास हुआ। जौनपुर को संवारने में सबसे ज्यादा योगदान शर्की शासकों का है, जिन्होंने इसे शिक्षा, संगीत और कला के केंद्र के रूप में स्थापित किया।
वह बताते हैं कि आजादी के बाद प्लेग रूपी महामारी का कहर हमने देखा है। तब इतने संसाधन नहीं थे, फिर भी शहर ने पूरे संयत भाव से इसका मुकाबला किया। कोरोना की महामारी उससे भी बड़ी और भयावह है, मगर यकीन है कि यहां के लोग इससे भी बखूबी निपटेंगे। टीडी कॉलेज के प्रबंधक अशोक सिंह और पूर्व विधायक हाजी अफजाल भी कोरोना को नियंत्रित रखने में शहरवासियों के धैर्य और संयम की सराहना करते हैं। उनका कहना है कि जिस तरह यहां के लोग सतर्कता बरत रहे हैं, यह दूसरों के लिए भी प्रेरणादायक है।