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संकट के सिपाही : कोरोना से भाई की मौत ...परिवार संक्रमित, फिर भी निभा रहे फर्ज

Thu, 13 May 2021 06:25 AM IST
दुष्यंत शर्मा अमर उजाला नेटवर्क, नई दिल्ली

सार

  • कुछ योद्धा खुद भी संक्रमित हुए पर वे सेवा और फर्ज की राह से अलग नहीं हुए
  • कोरोना योद्धाओं ने अपनी फिक्र की, परिवार को संभाला और सेवा भी जारी रखी
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कोरोना योद्धा : डॉ. वीरेंद्र सैनी, डॉ. एनके सिंह, डॉ. एसके मुसद्दी, डॉ. अवनीश सिंह और श्रीनिवास (ऊपर... बाएं से) - फोटो : amar ujala
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विस्तार
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आज की कड़ी में आपको मिलवाते हैं कुछ और संकट के सिपाहियों से जो अपने और परिवार की फिक्र करते हुए दूसरों की मदद लगातार करते रहे। कुछ योद्धा खुद भी संक्रमित हुए पर वे सेवा और फर्ज की राह से अलग नहीं हुए। 

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गर्भवती पत्नी को अकेला छोड़ निभाते रहे ड्यूटी
डॉ. अवनीश सिंह, जिला अस्पताल, जौनपुर

कोरोना महामारी के दौर में चिकित्सक सेवा की अनूठी मिसाल पेश कर रहे हैं। जिला अस्पताल में तैनात डॉ. अवनीश सिंह भी उनमें से एक हैं। खुद को खतरे से बचाते हुए वह मरीजों का उपचार कर रहे हैं। 14 अप्रैल को वह कोरोना से संक्रमित हुए थे। सर्दी-खांसी, बुखार शुरू होते ही उन्होंने तत्काल जांच कराई और रिपोर्ट पॉजिटिव आते ही खुद को आइसोलेट कर लिया। घर में उनकी पत्नी सात माह की गर्भवती हैं।

परिवार में कोई अन्य सदस्य न होने के कारण देखरेख की जिम्मेदारी भी उनकी थी। पत्नी और गर्भ में पल रहे बच्चे को सुरक्षित रखने के लिए उन्होंने परिवार से दूरी बना ली। 12 दिन तक आइसोलेशन में रहते हुए कोविड के बचाव मानकों और दवाओं का उपयोग करते रहे। समय पूरा होते ही वह 26 अप्रैल से ड्यूटी पर लौट आए हैं। पत्नी से दूरी बनी हुई है, ताकि कोरोना का खतरा उन तक न पहुंचे। डॉ. अवनीश का कहना है कि मरीज भी उनके परिवार के ही सदस्य हैं। संकट के इस काल में अगर वह ड्यूटी छोड़कर घर बैठ जाएंगे तो फिर मरीजों को कौन देखेगा।
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...आज जब लोगों को जरूरत है तो फर्ज से कैसे पीछे हट सकता हूं 
-डॉ. एसके मुसद्दी, (एमबीबीएस एमडी) मिर्जापुर

कोरोना संक्रमण के दौरान सरकारी अस्पताल की ओपीडी बंद है और निजी अस्पतालों में चिकित्सक नहीं मिल रहे हैं। ऐसे में कई कोरोना योद्धा जान की परवाह किए बगैर जरूरतमंदों की सेवा में लगे हैं। स्टेशन रोड स्थित समर्थ नर्सिंग होम का संचालन करने वाले डॉ. एसके मुसद्दी कोविड प्रोटोकॉल का पालन करते हुए मरीजों की सेवा कर रहे हैं। 

उन्होंने डेढ़ महीने से कोई अवकाश नहीं लिया है। वह दिन के आठ घंटे पीपीई किट में गुजारते हैं। इसके बाद लोगों को फोन पर परामर्श देते हैं। सरकारी अस्पताल में ओपीडी सेवा एक माह से बंद है। ऐसे में जिला प्रशासन ने फोन पर सलाह लेने के लिए निजी और सरकारी अस्पताल के डॉक्टरों का मोबाइल नंबर जारी किया है, पर कुछ डॉक्टर ही फोन पर सलाह दे रहे हैं। डॉक्टर एसके मुसद्दी भी अपने नर्सिंग होम में कोविड प्रोटोकॉल के तहत मरीजों का उपचार कर रहे हैं।

वह पहले प्रतिदिन 50 मरीज देखते थे, पर अब 80 से अधिक मरीजों को देख रहे हैं और उन्होंने ओपीडी का समय सीमा भी बढ़ा दिया है। शाम को चार बजे से छह बजे तक फोन पर नि:शुल्क सलाह भी देते हैं। कोरोना संक्रमण से जुड़े सवालों पर भी लोगों को परामर्श दे रहे हैं। डॉ. मुसद्दी बताते हैं कि संक्रमण से डर तो लगता है पर इस शहर ने उन्हें सब कुछ दिया है। आज जब यहां के लोगों को उनकी जरूरत है तो वे भला पीछे कैसे हट सकते हैं।

विपरीत हालात में मरीजों की सेवा देती है सुकून
डॉ. एनके सिंह, जिला प्रतिरक्षण अधिकारी, जौनपुर

जिला प्रतिरक्षण अधिकारी डॉ. एनके सिंह के कंधों पर इस समय कोरोना टीकाकरण की महत्वपूर्ण जिम्मेदारी है। सरकार की प्राथमिकता के इस कार्यक्रम में कहीं कोई चूक न हो, इसलिए वह विपरीत हालात में भी ड्यूटी पर लगातार डटे रहे। कोरोना संक्र्तमण की दूसरी लहर में उनके बड़े भाई का 13 अप्रैल को निधन हो गया। परिवार के अन्य सभी सदस्य संक्र्तमित हो गए। बीमारी के दौरान भाई व परिवार के सदस्यों के संपर्क में आने के कारण एहतियात के तौर पर उन्होंने खुद को आइसोलेट कर लिया, लेकिन टीकाकरण के कार्य में कोई व्यवधान नहीं आने दिया।

आइसोलेशन के दौरान भी वह लगातार घर से काम करते रहे। फोन पर सहकर्मियों को मार्गदर्शन देते रहे। समय से केंद्रों पर टीका पहुंचाना, उसकी सुरक्षा और कोई भी डोज खराब न हो, यह सुनिश्चित करने पर उनका विशेष जोर रहा। डॉ. एनके सिंह के प्रयासों का असर रहा कि अब तक 2.78 लाख लोगों को कोरोना टीका लग चुका है। डॉ. एनके सिंह का कहना है कि सब कुछ सामान्य रहे तो कोई भी काम कर लेगा। विपरीत हालात में काम करने का मजा ही अलग है।

खुद को खतरे में डाल सवा साल से आईसीयू कोविड वार्ड में दे रहे ड्यूटी
डॉ. वीरेंद्र सैनी, राजकीय मेडिकल कॉलेज, सहारनपुर

राजकीय मेडिकल कॉलेज के कोविड-19 आईसीयू वार्ड में पिछले सवा साल से डॉ. वीरेंद्र सैनी मरीजों का उपचार कर रहे हैं। सरसावा क्षेत्र के ग्राम चौरी मंडी के मूल निवासी डॉ. वीरेंद्र सैनी बताते हैं कि आईसीयू वार्ड की सबसे अधिक जिम्मेदारी का काम है, क्योंकि यहां पर सबसे गंभीर मरीजों को रखा जाता है। जरा सी लापरवाही भी मरीज की जान पर भारी पड़ सकती है। ऐसे में ड्यूटी के दौरान लगातार सजग रहना पड़ता है। वार्ड में दो दर्जन से भी अधिक वेंटिलेटर लगे हुए हैं, जिसके लिए उन्हें घंटों तक पीपीई किट पहनकर लगातार मॉनिटरिंग करनी पड़ती है।

मुख्य फिजिशियन होने के कारण उनकी जिम्मेदारी अधिक होती है कि मरीज को किसी भी तरह की परेशानी ना हो। उनकी पत्नी भी राजकीय मेडिकल कॉलेज में ही माइक्रोबायोलॉजिस्ट है। दंपती के सात साल की बेटी है। इस अवधि में उसकी जिम्मेदारी अन्य परिजन ही उठाते हैं। वे बताते हैं कि कई मौके ऐसे आए जब वे और उनकी पत्नी दोनों ही पारिवारिक कार्यक्रम में नहीं भाग ले सके। 

कोविड वार्ड की सफाई करते संक्रमित हो गए, पर नहीं बदली ड्यूटी 
श्रीनिवास, सफाईकर्मी, जेएन मेडिकल कॉलेज, अलीगढ़

कोरोना वायरस संक्रमण के खिलाफ प्रत्येक व्यक्ति अपने-अपने तरीके से जंग लड़ रहा है। चिकित्सक मरीजों के उपचार में जुटे हैं तो मेडिकल स्टाफ डॉक्टर्स का सहयोग कर रहा हैं। इन्हीं के बीच सफाई कर्मचारी भी हैं, जिनकी भूमिका सबसे चुनौतीपूर्ण है। ऐसे ही हैं जेएन मेडिकल कॉलेज के कोविड वार्ड में सफाई की जिम्मेदारी संभालने वाले श्रीनिवास। जो संक्रमित मरीजों के वार्ड की सफाई करते-करते खुद भी संक्रमित हो गए थे। स्वस्थ होने के बाद फिर उन्होंने अपना काम संभाल लिया। 

हालांकि, जेएन मेडिकल कॉलेज प्रशासन ने श्रीनिवास के समक्ष प्रस्ताव रखा कि वह अपनी ड्यूटी कोविड-19 वार्ड से हटाकर अन्य वार्ड में करवा सकते हैं। लेकिन श्रीनिवास ने यह प्रस्ताव ठुकरा  दिया। श्रीनिवास कहते हैं, अगर मैं यहां पर कार्य नहीं करता तो मेरी जगह मेरे जैसा ही कोई व्यक्ति यह कार्य करता। इसलिए मैं इस महामारी के खिलाफ जो अपना योगदान दे सकता हूं, दे रहा हूं। मुझे मेडिकल कॉलेज के डॉक्टर और चिकित्सा सुविधाओं पर पूरा भरोसा है।

श्रीनिवास कहते हैं, सबसे बड़ा सुखद एहसास तब होता है, जब यहां से स्वस्थ होकर जाने वाले मरीज सेवाभाव के लिए हमें याद करते हुए जाते हैं। कुछ मरीज यह भी कह कर गए हैं कि अगर उनके परिवार वाले भी होते तो वह शायद इतनी अच्छी तरह से देखभाल नहीं कर पाते, जितनी अच्छी तरीके से श्रीनिवास ने की है। यही हमारी उपलब्धि और पुरस्कार है।

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