वाराणसी जिला प्रशासन ने कोरोना के तीसरी लहर को लेकर युद्ध स्तर पर हर संभव तैयारियां शुरू कर दी है। इसके लिए डीएम कौशल राज शर्मा ने पीडियाट्रिक डॉक्टरों के कंसल्टेटिव कमिटी का गठन कर उनसे सुझाव भी मांगे हैं। वहीं अस्पतालों में आईसीयू और एनआईसीयू के बेड बढ़ाने की भी व्यवस्था की जा रही है।
डीएम ने कहा कि प्रशासन दो मोर्चों पर काम कर रहा है। एक ऑक्सीजन वाले बेड बढ़ाए जाएंगे। तीन अस्पतालओं में ऑक्सीजन जेनरेशन प्लांट लग गया है। 4 सरकारी अस्पतालों में और आठ सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्रों पर ऑक्सीजन प्लांट लगाए जाएंगे।
इसके अलावा निजी अस्पतालों को भी ऑक्सीजन प्लांट लगवाने के लिए प्रेरित किया जा रहा है। हम लोगों का पूरा प्रयास है कि सिलेंडर पर निर्भरता कम हो और लिक्विड ऑक्सीजन की क्षमता बढ़ाई जाए। प्रशासन आगामी 1 सप्ताह के भीतर तीसरी लहर की तैयारी में जुटा है।
कोविड-19 के इस दौर में जहां एंबुलेंस की सुविधा नहीं मिल पाने से कई लोगों ने दम तोड़ दिया, वहीं यहां चार एंबुलेंस खड़ी होकर सड़ रही हैं। इसकी मरम्मत करने की जहमत भी विभाग ने नहीं उठाई।
चोलापुर सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र के कैंपस में उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने हाल ही में एक कार्यक्रम का उद्घाटन किया था।
दो दिन पहले केंद्रीय मंत्री डॉ. महेंद्र नाथ पांडेय ने कोविड-19 सेंटर बनाने की भी बात कही है। वहीं ग्रामीण क्षेत्रों में गंभीर मरीजों को अस्पताल तक ले जाने में जद्दोजहद करनी पड़ती है, वहीं सरकारी एंबुलेंस लोगों की सुविधा के बजाय अस्पताल में एक कोने में खड़ी होकर धूल फांक रही है।
चोलापुर सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र के अधीक्षक डॉ. आरबी यादव ने बताया कि चोलापुर में चार एंबुलेंस खड़ी हैं, दो एंबुलेंस 102 की है जिसकी देखरेख 102 के विभाग के द्वारा किया जाता है। दो साल से खराब होने से खड़ी है। जबकि दो एंबुलेंस जिसे कबाड़ घोषित कर दिया गया है।
कोरोना काल में ब्लैक फंगस के मरीजों की बढ़ती संख्या को देखते हुए अब शासन-प्रशासन अलर्ट हो गया है। इधर, बीएचयू में इन मरीजों के इलाज को लेकर विशेषज्ञों की कोआर्डिनेशन कमेटी बनाई गई है। इसमें ईएनटी, नेत्र रोग, चेस्ट डिपार्टमेंट, डेंटल सर्जरी सहित अन्य विभागों के चिकित्सक शामिल हैं। ब्लैक फंगस के मरीजों के इलाज, जांच, ऑपरेशन में इस कमेटी की अहम भूमिका होगी।
कोरोना की दूसरी लहर में ब्लैक फंगस वाले मरीजों की संख्या अब तेजी से बढ़ती जा रही है। बीएचयू में ही ऐसे 25 से अधिक मरीज आ चुके हैं।