अस्पताल से फोन आया कि उन्हें वेंटिलेटर पर रखा गया है, लेकिन जवाब नहीं मिल रहा। थोड़ी देर बाद अस्पताल पहुंचे तो देखा कि डॉक्टर उन्हें चेक कर रहे। फिर दस मिनट बाद उन्हें मृत घोषित कर दिया। दोनों भाइयों के नीचे से जमीन खिसक गई। लगा अब मां को क्या जवाब देंगे, उन्हें कैसे संभालेंगे। अंबुज ने बताया कि वह दिल्ली में आईटी कंपनी में जॉब करते हैं। पिछले डेढ़ साल से घर पर हूं और कोविड की वजह से आधी सैलरी मिल रही है। घर की सारी जिम्मेदारियां आ गई हैं। सबसे बड़ी चिंता घर के लोन की सता रही है।
सुरेश चंद्र पांडेय के बेटे अंबुज पांडेय ने बताया कि मृतक आश्रित के तहत मेरे छोटे भाई पंकज ने आवेदन किया है। उसने इसी साल बीएड की पढ़ाई पूरी की है और टीईटी की तैयारी कर रहा है। हमने टीईटी के लिए समय मांगा है जिसे विभाग ने स्वीकार कर लिया है।