अब सबकुछ 30 सेकंड में चाहिए, दिमाग पर पड़ रहा असर
साइकोलॉजी से एमए में गोल्ड मेडल हासिल करने वाली सतना निवासी नेहा नेमा ने कहा कि घर में माता भी एमए हिंदी में गोल्ड मेडलिस्ट रहीं। अब वह इसी विषय में पीएचडी या फिर क्लीनिकल साइकोलॉजी पर काम करेंगी। नेहा ने कहा कि रील्स और सोशल मीडिया एक्सप्लोजन ने लोगों की सोच और दिमाग को 30 सेकेंड में बांधकर रख दिया है। हर किसी को शॉर्ट वीडियो में ही सारा कुछ ज्ञान चाहिए। इससे अटेंशन स्पैन यानी कि मनुष्यों की ध्यान अवधि घट गई है। याद करने की क्षमता कम हो गई है। निगेटिव असर हो रहा है। इस पर काम करूंगी।
महामना आधारित शिक्षा को दूंगी बढ़ावा
भविष्य में शिक्षक बनना है क्योंकि घर में तीन लोग पापा, बड़े पापा और भाई शिक्षक हैं। नई शिक्षा नीति के तहत कई बदलाव आए हैं, उस अनुसार पढ़ाई में बदलाव लाकर बच्चों को शिक्षित किया जाएगा। सबसे जरूरी बीएचयू आधारित चरित्र और नैतिकता की शिक्षा भी बच्चों में दी जाएगी। - जागृति मिश्रा
पिता पुरातत्वविद और बेटी पढ़ रही भूगोल
पटना से निकलकर बीएचयू आई और यहीं से पीजी पूरा करना है। पिता आर्कियोलॉजिकल सर्वे ऑफ इंडिया में कार्यरत हैं लेकिन मुझे भूगोल विज्ञान काफी करीब लगता है। इससे यूपीएससी परीक्षा के वैकल्पिक पेपर को लिखने में काफी मदद मिलेगी। पिता ने कभी भी विषय का चुनाव करने में नहीं रोका। - सांभवी सौम्य, गोल्ड मेडल, यूजी-भूगोल
जालौन से आने के बाद 16 साल से बीएचयू में हूं। बैंकिंग इंश्योरेंस एंड रिटेल मैनेजमेंट में गोल्ड मेडल मिलने के बाद पीजी भी इसी क्षेत्र में करना है। शेयर मार्केट और वित्तीय धोखाधड़ी खूब हो रही है। कभी भी ज्यादा कुछ जाने बगैर पैसा निवेश नहीं करना चाहिए। भाई बीएचयू में ही सीएमएस हैं। - सुमित प्रताप सेंगर, स्नातक, गोल्ड मेडलिस्ट
फैशन सेक्टर में ही पीएचडी कर प्रोफेसर बनना है। फैशन की स्किल्स बदल रही है। क्लासिक फैशन का चलन कभी भी खत्म नहीं होेगा। साड़ी इसका उदाहरण है। इंडो वेस्टर्न फैशन और काशी के बुनकरों के साथ भी काम किया है। डाइंग-पेंटिंग और बुनकरी का भी ज्ञान लिया है। - प्रियंका गुप्ता, एमए, फैशन टेक्नोलॉजी में गोल्ड मेडलिस्ट
वसंता राजघाट की मेधावियों को 11 गोल्ड और 668 उपाधियां
बीएचयू के मालवीय मूल्य अनुशीलन केंद्र में वसंत महिला महाविद्यालय राजघाट से उत्तीर्ण छात्राओं को 11 गोल्ड मेडल और 668 को उपाधियां दी गईं। कला, सामाजिक विज्ञान, शिक्षा और वाणिज्य संकाय से स्नातक में 317 और स्नातकोत्तर में 351 उपाधियां मंच से मिलीं। कला संकाय में बीए छात्रा सौमिता दत्ता, बीए (ऑनर्स) अंग्रेजी से कुमारी काशिश विश्वकर्मा, शौकत मजीद को दो गोल्ड, उर्दू एमए कुमारी मुनज्ज़ा अदीब।
सामाजिक विज्ञान संकाय से नेहा नेमा, कुमारी शांभवी सौम्या, शिक्षा संकाय से कुमारी जागृति मिश्रा, वाणिज्य संकाय से बी.कॉम की सोनम गर्ग में गोल्ड मेडल दिया गया। प्राचार्य प्रो. अलका सिंह ने कहा, सफलता कभी अंतिम नहीं होती और असफलता सदा के लिए नहीं होती। अपने ज्ञान और क्षमताओं का उपयोग समाज और राष्ट्र के हित में सार्थक योगदान देने के लिए करें।
मुख्य अतिथि राजेंद्र गोयनका ने कहा कि दीक्षांत समारोह एक जिम्मेदार नागरिक के रूप में नए जीवन की शुरुआत का प्रतीक है। जीआई विशेषज्ञ डॉ. रजनीकांत, डॉ. सुनीता आर्या, डॉ. आकांक्षी श्रीवास्तव, प्रो. यूपी शाही, प्रो. पीएन सिंह, प्रो. राकेश रमन, प्रो. एनके मिश्रा, डॉ. एहसान हसन आदि मौजूद रहे।