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बीएचयू और इलाहाबाद विश्वविद्यालय को लेकर चले शब्दों के तीर

Thu, 29 Jun 2017 01:23 PM IST
amarujala.com, written by रबीश श्रीवास्तव
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manoj sinha - फोटो : अमर उजाला
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बीएचयू में आयोजित डाक टिकट विमोचन समारोह महामना के संकल्पों, उद्देश्यों और उपलब्धियों से होते हुए अचानक बनारस और इलाहाबाद यूनिवर्सिटी के बीच श्रेष्ठता के मुद्दे पर केंद्रित हो गया।
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बीएचयू छात्रसंघ के पूर्व अध्यक्ष और संचार राज्यमंत्री (स्वतंत्र प्रभार) मनोज सिन्हा ने विश्वविद्यालय के गौरवमयी अतीत का जिक्र करते हुए इलाहाबाद का मुद्दा उछाल दिया। कुलपति प्रो. जीसी त्रिपाठी (जो इलाहाबाद विश्वविद्यालय के पूर्व छात्र और प्रोफेसर रह चुके हैं) इसका जवाब देने से नहीं चूके।

उन्होंने एक को नेशन बिल्डिंग, दूसरे को कॅरियर बिल्डिंग के उद्देश्य से जोड़ते हुए पटाक्षेप की कोशिश की।

मनोज सिन्हा: इलाहाबाद ये बड़ा हरामजादा शहर है सिन्हा ने कहा, बीएचयू परिसर में आने के बाद लगता है कि कहीं स्वर्ग में प्रवेश हो गया है और विशेष रूप से शिक्षकों का जो स्नेह इस विश्वविद्यालय के विद्यार्थियों को प्राप्त है। मुझे लगता है कि दूसरे किसी शिक्षण संस्थान या विश्वविद्यालय में नहीं मिलता है।
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डॉक्टर साहब (कुलपति प्रो. जीसी त्रिपाठी) आप बुरा मत मानिएगा। ये गौरव किसी दूसरे विश्वविद्यालय के विद्यार्थी को प्राप्त नहीं है। एक दिन मैं एक कार्यक्रम में मऊ में था, वहां गवर्नर साहब भी थे। एक साहित्यकार मऊ के थे, वे इलाहाबाद विवि में हिंदी विभाग में थे। पुराने समाजवादी भी थे।

वहां इलाहाबाद के बहुत से लोग आ गए, वे इलाहाबाद ही बके---बताए जा रहे थे। अंत में मुझे धर्मवीर भारती की एक पंक्ति कोट करनी पड़ी। जहां उन्होंने लिखा कि ‘इलाहाबाद ये बड़ा हरामजादा शहर है।

कुलपति: बीएचयू राष्ट्र का संकल्प है प्रो. त्रिपाठी बोले, बनारस हिंदू विश्वविद्यालय राष्ट्र का संकल्प है। जब मैं रहता हूं तो मान्यवर मंत्री जी इलाहाबाद विश्वविद्यालय की चर्चा जरूर करते हैं। काशी हिंदू विश्वविद्यालय को किसी दूसरे विश्वविद्यालय से घबराहट हो, ये मैं सोच भी नहीं सकता। हम दोनों (इलाहाबाद विवि और काशी हिंदू विश्वविद्यालय) अलग नहीं हैं।

मैंने इमानदारी से कहा कि इलाहाबाद विश्वविद्यालय कॅरियर बिल्डिंग के लिए अंग्रेजों ने बनाया था और बीएचयू को नेशन बिल्डिंग के लिए मालवीय जी ने बनाया। मुझे भी अपने विश्वविद्यालय के प्रति बहुत सम्मान का भाव है लेकिन जो भाव यहां के छात्रों का विश्वविद्यालय के प्रति है, उसे देख ईर्ष्या होती है। पूज्य महामना जी को पूरा देश चाहता था। अपनी संस्कृति के कारण यह विश्वविद्यालय सभी विश्वविद्यालयों से ऊपर है।
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