भगवान शिव की आंख है रुद्राक्ष
रुद्राक्ष को भगवान शिव की आंख माना जाता है। आचार्य दैवज्ञ कृष्ण शास्त्री ने बताया कि रुद्राक्ष की उत्पत्ति भगवान शिव की आंसू से हुई है। इसलिए इसे भगवान शिव की आंख माना गया है। रुद्राक्ष को स्वयं देवाधिदेव महादेव भी धारण करते हैं।
इसको धारण करने से भगवान शिव की कृपा बरसती है। साथ ही राशि के अनुसार धारण करने से और फलदायी होता है। इसके अलावा व्यक्ति में एकग्रता बढ़ती है और जीवन में सुख-समृद्धि का वास होता है।
21 मुखी तक होता है रुद्राक्ष
रुद्राक्ष एक मुखी, दो मुखी, पंचमुखी समेत 21 मुखी तक होता है। आचार्य दैवज्ञ कृष्ण शास्त्री ने बताया कि एक मुखी भगवान शिव स्वयं धारण करते थे। दो मुखी गौरी शंकर के रूप में होता है। सामान्यत: लोग पंच मुखी रुद्राक्ष धारण करते हैं। मगर, एक मुखी रुद्राक्ष कम मिलता है। इसको धारण करने वाला बहुत शक्तिशाली होता है। फुटकर में इनकी कीमत 70 से 200 रुपये तक है।
चार गुना बढ़ी काशी विश्वनाथ से जुड़ी चीजों की मांग
सावन पर काशी विश्वनाथ से जुड़ी चीजों की मांग चार गुना बढ़ी है। वहीं, लोग जमकर केसरिया और बाबा भोले प्रिंट टी-शर्ट, कुर्ते, हाफ पैंट, बैंड, ब्रेसलेट की खरीदारी कर रहे हैं। कांवड़ और अन्य चीजें भी थोक और फुटकर में बिक रही हैं।
काशी रेडिमेड गारमेंंट एसोसिएशन के संरक्षक श्रीनारायण खेमका ने बताया कि सावन में श्रीकाशी विश्वनाथ की फोटो, लकड़ी के कॉरिडोर मॉडल समेत अन्य चीजों की मांग काफी बढ़ जाती है। अन्य जिलों से फुटकर दुकानदार थोक में खरीदारी करते हैं।
दशाश्वमेध व्यापार मंडल के अध्यक्ष सुरेश तुलस्यान ने बताया कि बाजार में भगवा रंग के कपड़े छाए हुए हैं। मंदिर के आसपास इनकी मांग ज्यादा है। बाजार में कुर्ता 400 रुपये, ब्रेसलेट 200 रुपये, कड़ा 70 रुपये, बैंड 50 रुपये, बाबा भोले की टीशर्ट 200 से 250 रुपये तक है।