Varanasi News: यह क्षेत्र 13,250 वर्ग फीट में होगा। श्मशान घाट पर शव स्नान के लिए पवित्र जल कुंड, वेटिंग एरिया होंगे। भूतल पर पंजीकरण कक्ष, नीचे के खुले में दाह संस्कार के 19 बर्थ, लकड़ी भंडारण क्षेत्र, सामुदायिक प्रतिक्षा कक्ष, दो सामुदायिक शौचालय, अपशिष्ट ट्रालियों का स्थापन, मुंडन क्षेत्र होंगे।
मणिकर्णिका और हरिश्चंद्र घाट के मलबों से ही दोनों श्मशान घाटों के प्लेटफॉर्म बनाए जाएंगे। अत्याधुनिक शवदाह के निर्माण कार्य के लिए ढहाए गए पुराने निर्माण के मलबों का इस्तेमाल प्लेटफॉर्म बनाने के लिए किया जाएगा। घाट पर कामकाज के लिए जगह बनाने के लिए मलबों को क्रूज से गंगा पार डोमरी ले जाने की तैयारी की गई है। यहां पर सतुआ बाबा का आश्रम है। यहीं पर मलबा रखा जाएगा। इसके बाद जरूरत के अनुसार मलबा लाकर प्लेटफाॅर्म तैयार किया जाएगा।
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कार्यदायी एजेंसी के अधिकारियों ने बताया कि मलबे को उठाने के लिए क्रूज संचालक से बातचीत की जा रही है। क्रूज किनारे आसानी से लग जाए, इसके लिए किनारे पर मलबे को समतल किया जा रहा है। निर्माण कार्य शुरू कराने के लिए बाहर से मशीनें मंगा ली गई हैं। पिलर खड़ा करने के लिए मशीनों का इस्तेमाल किया जाएगा। इसके लिए गंगा किनारे घाट पर बड़े बड़े होल किए जाएंगे।
दोनों श्मशान घाट के विकास कार्य पर कुल 34.86 करोड़ रुपये खर्च होंगे। मणिकर्णिका घाट के विकास कार्य में 18 करोड़ रुपये खर्च होंगे। भूतल का कुल क्षेत्रफल 29.350 वर्ग फीट है। इसी प्रकार हरिश्चंद्र घाट के विकास पर 16.86 करोड़ रुपये खर्च होंगे।
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श्मशान घाट पर खुले में नहीं होगा दाह संस्कार
दोनों ही श्मशान घाट पर दाह संस्कार खुले में नहीं होगा। दाह संस्कार क्षेत्र को चारों तरफ से कवर किया जाएगा। इसमें पांच बर्थ, सर्विस एरिया, अपशिष्ट संग्रह की व्यवस्था होगी। यहां शवदाह के लिए आने वाले लोगों को पूरी सुविधाएं दी जाएंगी। चुनार और जयपुर के पत्थरों से महाश्मशान का निर्माण कार्य पूरा कराया जाएगा।