संगोष्ठी में सम्बोधन करते राज्यसभा सांसद राजीव शुक्ला
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धार्मिक और सांप्रदायिक कट्टरता की संकीर्ण सोच किसी भी राष्ट्र की एकता और विकास की सबसे बड़ी चुनौती होती है। पाकिस्तान के पिछड़ापन और दुबई के समृद्ध विकास का अंतर इसका सबसे बड़ा उदाहरण है।
पाकिस्तान की धार्मिक-सांप्रदायिक कट्टरता की राजनीति ही उसकी सबसे बड़ी चुनौती और उसके विकास में सबसे बड़ा बाधक है। आज देश में भी कट्टरता, सांप्रदायिकता के उसी तरह के हालात बनाए जा रहे हैं। ये बातें कांग्रेस के राज्यसभा सांसद एवं राष्ट्रीय प्रवक्ता राजीव शुक्ला ने वाराणसी में कहीं।
उन्होंने नाम लिए बगैर मोदी सरकार पर धर्म और जाति की राजनीति का आरोप लगाया। कहा कि धर्म और जाति की राजनीति देश को तोड़ती है। नेतृत्व किसी के हाथ में हो, उसे सामाजिक सरोकारों पर गौर करना चाहिए।
वह मंगलवार को काशी बौद्धिक मंच की ओर से पराड़कर स्मृति भवन में आयोजित राष्ट्रीय एकता की चुनौतियां विषयक संगोष्ठी को बतौर मुख्य अतिथि संबोधित कर रहे थे। उन्होंने अपने 45 मिनट के संबोधन में बीजेपी या नरेंद्र मोदी का नाम नहीं लिया लेकिन मोदी सरकार को घेरने में कोई कसर नहीं छोड़ी।
केंद्र की अर्थ नीति, विदेश नीति और राष्ट्रीय सुरक्षा नीति पर सवाल खड़े किए। कहा कि सरकार कोई रहे अर्थ, विदेश और राष्ट्रीय सुरक्षा की नीति नहीं बदलनी चाहिए। नोटबंदी के फैसले पर भी सरकार को आड़े हाथों लिया।