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देश में 34 साल बाद आई नई शिक्षा नीति, दिखेंगे सकारात्मक परिणाम

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डीएवीपीजी कॉलेज में बृहस्पतिवार को आयोजित युवा संवाद सम्मेलन में केंद्रीय शिक्षामंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने शिक्षा का भविष्य और भविष्य की शिक्षा विषय पर युवाओं से संवाद किया। इस दौरान नई शिक्षा नीति, डिजिटल विश्वविद्यालय की परिकल्पना सहित कई बिंदुओं पर चर्चा की गई। प्रधान ने कहा कि देश में 34 वर्षों बाद नई शिक्षा नीति लाई गई है। इसके परिणाम भी सकारात्मक होंगे। 21 वीं सदी का भारत विश्व का नेतृत्व करेगा और यह संकल्पना भारत के युवाशक्ति द्वारा ही संभव की जाएगी।
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कॉलेज के सभागार में आयोजित संवाद में प्रधान ने कहा कि सरकार के सामने सबसे बड़ी चुनौती नौजवानों को अवसर देना, महिलाओं को बराबरी का अधिकार दिलाना और गरीबों का स्वाभिमान बढ़ाना है, इसमें काफी हद तक सफलता मिल रही है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने डिजीटल विश्वविद्यालय की जो परिकल्पना की है, उसके लिए विशिष्ट लैब के लिए डीएवीपीजी कॉलेज से उपयुक्त कोई जगह नही हो सकती है। नई शिक्षा नीति के तहत बहुत जल्द मातृभाषा आधारित शिक्षा व्यवस्था शुरू की जाएगी, इससे भाषायी विविधता पर होने वाली समस्या समाप्त होगी। उन्होंने युवाओं से बढ़चढ़कर मतदान करने की अपील के साथ ही कॉलेज में छात्रों की सुविधाओं, पढ़ाई के माहौल आदि की सराहना की। प्राचार्य डॉ. सत्यदेव सिंह ने भी विचार रखे। इस दौरान प्रबंधक अजीत सिंह यादव, डॉ. समीर कुमार पाठक, डॉ. दयाशंकर मिश्र, डॉ. प्रदीप कमल, डॉ. विक्रमादित्य राय, डॉ. अनूप कुमार मिश्रा सहित अन्य लोग मौजूद रहे।
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