संपूर्णानंद संस्कृत विश्वविद्यालय में शिक्षक भर्ती प्रक्रिया को लेकर कुलपति और शिक्षकों के बीच रार बढ़ती जा रही है। मंगलवार को संकाय प्रमुखों द्वारा परीक्षा समिति की बैठक का बहिष्कार करने के बाद अब अध्यापक परिषद ने भी नियुक्ति प्रक्रिया पर सवाल उठाए हैं। साथ ही कुलपति पर मनमानी का आरोप लगाया है। साथ ही कुलाधिपति से नियुक्ति प्रक्रिया निरस्त करने की भी मांग भी की है। उधर, कुलपति ने शिक्षकों के आरोपों को निराधार बताया है।
विश्वविद्यालय में असिस्टेंट प्रोफेसर के 56 पदों पर भर्ती के लिए पात्रता परीक्षा कराने के बाद अब परिणाम भी वेबसाइट पर जारी कर दिया गया है। इस पर दो जून तक आपत्ति मांगी गई है। मंगलवार को परीक्षा समिति के सदस्यों (पांच संकाय प्रमुखों और एक आमंत्रित सदस्य) ने बैठक का बहिष्कार कर दिया था। बुधवार को अध्यापक परिषद की प्रो. रामपूजन पांडेय की अध्यक्षता में हुई बैठक में परीक्षा समिति के सदस्यों के फैसले की सराहना की गई। महामंत्री प्रो. अमित कुमार शुक्ल ने बताया कि जब नियुक्ति प्रक्रिया के लिए परीक्षा कराई गई, परिणाम जारी किया गया है तो प्रश्नपत्र और उत्तर कुंजी विश्वविद्यालय की वेबसाइट पर क्यों नहीं अपलोड की गई। न तो अभ्यर्थियों को प्रश्न पुस्तिका ले जाने दिया गया और न ही उत्तर पत्रक की कार्बन कॉपी दी गई। बैठक में सदस्यों ने कुलपति पर नियुक्ति प्रक्रिया में नियमों की अनदेखी के साथ ही आर्थिक अनियमितता का आरोप लगाते हुए कुलाधिपति से नियुक्ति प्रक्रिया को निरस्त करने की मांग की है।
असिस्टेंट प्रोफेसर पद पर जो भी नियुक्ति प्रक्रिया चल रही है, वह नियमानुसार और राजभवन से प्राप्त दिशानिर्देशों के तहत है। पूरी प्रक्रिया की वीडियोग्राफी भी कराई गई है। ऐसे में अध्यापक परिषद और परीक्षा समिति के सदस्यों द्वारा जो भी आरोप लगाए जा रहे हैं, वह निराधार हैं। - प्रो. हरेराम त्रिपाठी, कुलपति