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राष्ट्रपति व प्रधानमंत्री तक पहुंची काशी हिंदू विश्वविद्यालय के कुलपति की शिकायत

Sun, 12 Jan 2020 10:59 PM IST
स्‍वाधीन तिवारी न्यूज डेस्क, अमर उजाला, वाराणसी
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- फोटो : a
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बीएचयू में शिक्षकों की नियुक्ति में साक्षात्कार के दौरान हिंदी भाषी अभ्यर्थियों से भेदभाव का विरोध बढ़ता जा रहा है। कुलपति पर भेदभाव का आरोप लगाने वाले छात्रों ने धरना-प्रदर्शन, जुलूस के बाद अब सामूहिक हस्ताक्षर वाला पत्र राष्ट्रपति भवन भेजकर मामले की शिकायत की है।

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एक दो नहीं बल्कि विश्वविद्यालय परिसर के विभिन्न संकायों से 90 छात्रों ने एक पत्र पर हस्ताक्षर कर कुलपति के इस कदम की निंदा करते हुए विश्वविद्यालय के विजिटर और राष्ट्रपति से कार्रवाई की मांग की है। इसकी प्रति प्रधानमंत्री और मानव संसाधन विकास मंत्रालय को भी भेजी गई है। ट्विटर से भी भेजकर शिकायत की गई है।

दरअसल, तीन जनवरी को प्राचीन इतिहास विभाग विषय में असिस्टेंट प्रोफेसर पद पर साक्षात्कार देने वाले अभ्यर्थियों ने कुलपति पर हिंदी भाषा में साक्षात्कार देने से मना करने का का आरोप लगाया था। इसके बाद कुलसचिव से शिकायत, कुलपति को संविधान की प्रतियां और हिंदी व्याकरण की पुस्तक भेजने के साथ ही दस जनवरी को कैंपस में मार्च भी निकाला गया था।
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अब विधि संकाय के पूर्व छात्र सौरभ तिवारी के निर्देशन में कला संकाय, कृषि विज्ञान संस्थान, समाज विज्ञान संकाय, विधि संकाय, अर्थशास्त्र विभाग के छात्रों ने शिकायत पत्र पर सामूहिक हस्ताक्षर कर विरोध जताया है। राष्ट्रपति को भेजे गए शिकायती पत्र में कहा गया है कि न केवल हिंदी भाषा में साक्षात्कार से रोका गया बल्कि ऐसा कर कुलपति ने हिंदी भाषा का अपमान किया है।
 

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बीएचयू - फोटो : BHU
यह मौलिक अधिकारों का भी हनन है। छात्रों का आरोप है कि हिंदी भाषी अभ्यर्थियों को केवल तीन से चार मिनट तक का ही समय दिया गया। छात्रों ने सामूहिक रुप से कुलपति पर दंडात्मक कार्रवाई कि मांग की है।
 
राष्ट्रपति को भेजी गई शिकायत पत्र के बारे में कोई जानकारी नहीं है। विश्वविद्यालय में यूजीसी और भारत सरकार के नियमों के अनुरुप ही नियुक्ति प्रक्रिया कराई जाती है। ऐसे में कुलपति पर तथाकथित भाषाई भेदभाव का आरोप लगाना गलत है। अभ्यर्थियों से अपेक्षा की जाती है कि वो हिंदी के साथ पूछे जाने पर अंग्रेजी में भी उत्तर दें। विश्वविद्यालय को उत्कृष्ट बनाने में सहयोग दें।
डॉ. राजेश सिंह, पीआरओ, बीएचयू
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