वाराणसी। बीएचयू अस्पताल में वेंटिलेटर खराब होने के कारण स्वाइन फ्लू से पीडि़त महिला की मौत के मामले की जांच बीएचयू कराएगा। चिकित्सा विज्ञान संस्थान के निदेशक प्रो. आरजी सिंह ने पूरे प्रकरण की निष्पक्ष जांच के लिए कमेटी गठित करने की बात कही है।
उनका कहना है कि मामला संवेदनशील है और सच्चाई सबके सामने आनी चाहिए। उधर, पीडि़त परिवार का कहना है कि यदि बीएचयू में समुचित इलाज हुआ होता तो मरीज की जान बचाई जा सकती थी।
गाजीपुर सैदपुर की रहने वाली ऊषा पांडेय (62) को 11 अप्रैल को बीएचयू अस्पताल में भर्ती कराया गया था। 13 अप्रैल को स्वाइन फ्लू की पुष्टि के बाद उन्हें आईसीयू में भर्ती किया गया, जहां पर उन्हें वेंटिलेटर पर रखा गया। 16 अप्रैल को ऊषा के घरवालों को यह बताया गया कि जिस वेंटिलेटर पर मरीज को रखा गया है उसमें तकनीकी खराबी आ गई है।
ऊषा के बेटे मनोज का आरोप है कि कई बार कहने पर भी अस्पताल प्रशासन ने उनके मरीज को दूसरे वेंटिलेटर पर शिफ्ट नहीं किया जिससे उनकी हालत बिगड़ती गई। अस्पताल प्रशासन ने उन्हें इस बात की भी इजाजत नहीं दी कि वो बाहर से वेंटिलेटर मंगाते। आखिर में वे मरीज को दूसरे अस्पताल ले गए जहां पर उनकी मौत हो गई।
उधर, बीएचयू अस्पताल में उस वक्त ड्यूटी पर रहे डिप्टी सीएमओ डॉ. कुंदन सिन्हा ने मनोज के आरोपों को बेबुनियाद बताया है। जबकि चिकित्सा अधीक्षक प्रो. केके गुप्ता का कहना है कि मरीज की हालत पहले ही गंभीर थी। रही बात वेंटिलेटर के खराब होने की तो तकनीकी खराबी कभी भी आ सकती है।
अस्पताल के पास संसाधन सीमित हैं और मरीजों का दबाव ज्यादा है। मामले को गंभीरता से लेते हुए आईएमएस निदेशक प्रो. आरजी सिंह ने जांच के लिए कमेटी गठित करने की बात कही है। उनका कहना है कि मंगलवार को कमेटी गठित कर मामले की जांच कराई जाएगी।