रुद्राक्ष इंटरनेशनल कन्वेंशन सेंटर में काशी शब्दोत्सव के पांचवें सत्र में युवाओं को संबोधित करते हुए मनोज मुंतशिर ने कहा कि 11वीं सदी के पहले औरत शब्द भारत में नहीं था। यह अरेबिक शब्द है। इसके पहले नारी और स्त्री शब्द का इस्तेमाल होता था। हम नारी को सर्वोच्च सम्मान देने वाली संस्कृति हैं। मनोज ने कहा कि आप संकल्प लीजिए कि आज के बाद किसी भी स्त्री के लिए औरत शब्द का इस्तेमाल नहीं करेंगे। सभी ने एक साथ संकल्प दोहराया।
रुद्राक्ष इंटरनेशनल कन्वेंशन सेंटर में मनोज मुंतशिर
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उन्होंने गुलामी के प्रतीकों के बारे में चर्चा करते हुए कहा कि अभी तक जो जीता वही सिकंदर पर कहां अटके हुए हो। अब जो जीता वो बाजीराव और जो जीता वो छत्रपति शिवाजी महाराज। मनोज मुंतशिर ने कहा कि हमारे देश में पढ़ाए जा रहे सेलेक्टिव इतिहास में कई लूप होल हैं।
हमें यह तो पढ़ाया जाता है कि ताजमहल किसने बनवाया लेकिन यह नहीं पढ़ाया जाता कि सोमनाथ, काशी और मथुरा को किसने तहस-नहस किया। हमें बार-बार बताया गया कि राष्ट्रपिता महात्मा गांधी को किसने मारा लेकिन यह नहीं पढ़ाया गया कि गुरु गोविंद सिंह के साहिबजादों को जिंदा दीवार में किसने चुनवा दिया। इतिहास उतना ही पढ़ाया गया जिससे आपका भला होता हो।
मनोज मुंतशिर ने कहा कि कला के जितने दिग्गज पूरे भारतवर्ष में हैं, उनकी अगर एक सूची बनाई जाए तो आप यह जानकार हैरान रह जाएंगे कि आधे से ज्यादा बनारस से निकलेंगे। कश्मीर के लालचौक पर अभी झंडा फहराया गया, मैं बड़ा खुश हूं कि हमने इतना सुरक्षित कश्मीर बना दिया है कि कोई भी लालचौक पर जाकर झंडा फहरा सकता है।