डीएम ने एक सप्ताह में मांगी थी डॉक्टरों की सूची
प्राइवेट प्रैक्टिस करने वाले सरकारी डॉक्टरों पर नकेल कसने में जिला प्रशासन और स्वास्थ्य विभाग दोनों की हनक काम नहीं कर रही है। डीएम और सीएमओ दोनों ऐसे डॉक्टरों को चिहिन्त करने में ही अटके हुए हैं और प्राइवेट प्रैक्टिस करने वाले डॉक्टर निश्चिंत हैं।
हालत यह है कि डीएम ने सीएमओ से जो सूची एक सप्ताह में मांगी थी, 15 दिन बीतने के बावजूद किसी डॉक्टर पर कार्रवाई की बात तो दूर एक नाम तक सामने नहीं आया है।
प्रदेश में सरकार बनने के बाद मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के साथ ही स्वास्थ्य मंत्री सिद्धार्थ नाथ सिंह निजी प्रैक्टिस करने वाले सरकारी डॉक्टरों पर कार्रवाई की बता कही थी।
इसके तुरंत बाद डीएम योगेश्वर राम मिश्र ने सक्रियता दिखाते हुए निजी प्रैक्टिस करने वाले 50 डॉक्टरों को अनुमान लगाते हुए सीएमओ से एक सप्ताह में सूची मांगी थी। डीएम ने तो गोपनीय जांच कराने की बात कही थी लेकिन उसका भी कुछ पता नहीं चल पा रहा है।
उधर सीएमओ डॉ. वीबी सिंह भी चार डॉक्टरों की सूची डीएम कार्यालय को भेजने का दावा कर रहे हैं जबकि डीएम की मानें तो उन्हें सूची नहीं मिली है।