मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने शनिवार को यहां 1011 ग्राम पंचायतों से आए प्रधानों से नदी संस्कृति को पुनर्जीवित करने और गंगा की निर्मलता के लिए जन सहभागिता की अपील की।
गंगा में मूर्ति विसर्जन न करने का संकल्प दिलाने के साथ ही आह्वान किया कि पौधे सरकार उपलब्ध कराएगी, आप सब एकजुट होकर नदी तटों पर सघन पौधरोपण अभियान चलाएं। ‘नमामि गंगे’ परियोजना का जिक्र करते हुए गंगा निर्मलता के लिए प्रधानमंत्री के प्रयासों की सराहना की।
कहा, गंगा हमारी मां हैं। हमारी संस्कृति का प्रतीक हैं। उनसे किसी भी तरह का द्रोह मानव संस्कृति से द्रोह जैसा है। आज नदी संस्कृति सूख रही है क्योंकि मनुष्य अपनी भौतिक प्यास बुझाने में लग गया है। दिल्ली से लेकर मथुरा, वृंदावन और आगरा में यमुना का जो हाल हुआ है, वो हमारे लिए खतरे की घंटी है। अगर गंगा और यमुना नहीं बचीं तो उत्तर भारत भी नहीं बचेगा। समूचा उत्तर भारत रेगिस्तान बन जाएगा।
बीएचयू स्वतंत्रता भवन में आयोजित स्वच्छ गंगा सम्मेलन में गंगा किनारे के 25 जिलों से आए ग्राम प्रधानों से मुख्यमंत्री ने कहा कि पूजा सामग्रियां प्रवाहित करने से भी गंगा प्रदूषित हो रही हैं। पूजा सामग्री गंगा में प्रवाहित करने से बेहतर है कि हम गंगा किनारे छोटे-छोटे कुंड बनाएं।
इन कुंडों में पूजा की विधियां संपन्न करें। गंगा में सिर्फ आचमन कर उसे निर्मल बनाने में योगदान दें। कहा, नदी संरक्षण में जनप्रतिनिधियों का सहयोग बहुत जरूरी है। गंगा और यमुना दोनों नदियों के तटों पर सघन स्तर पर पौधरोपण किया जाए। प्रदेश सरकार आपको वृक्ष उपलब्ध कराएगी, आप उन्हें लगाने की तैयारी करिए।
मुख्यमंत्री ने तीन दशक पहले गंगा की सफाई के लिए बने गंगा एक्शन प्लान की नाकामी का जिक्र करते हुए केंद्र की पूर्ववर्ती सरकारों को भी घेरा। गंगा संरक्षण के लिए महामना मदन मोहन मालवीय के प्रयासों और उनकी प्रतिबद्धता का जिक्र करते हुए कहा कि प्रधानमंत्री के प्रयासों के साथ प्रदेश सरकार मजबूती से खड़ी है। जन-जन की भागीदारी हो और नदी संरक्षण की मुहिम जनअभियान का रूप ले।