भाजपा के चार साल पूरे होने वाले हैं और जिस गति से पीएम की योजनाओं की रफ्तार है। वह धीमी है। सूत्रों की मानें तो यही कारण है कि सीएम योगी आदित्यनाथ हादसे के पांचवें दिन फिर बनारस आए और पीएम की 85 योजनाओं की रफ्तार को बढ़ाने का सख्त संदेश दे गए हैं।
अधिकारियों के खेमे में जहां काम को समय से पूरा कराने का दबाव है तो वहीं जनप्रतिनिधियों को इसकी मानीटरिंग की जिम्मेदारी दी गई। इसके अलावा अधिकारियों को समय से काम पूरा कराने की हिदायत दी गई।
पढ़ेंः
वाराणसी सेंट्रल जेल में क्रांतिकारी चंद्रशेखर आजाद की प्रतिमा का सीएम योगी ने किया अनावरण
दरअसल बनारस में आपसी राजनीति के चक्कर में कुछ जनप्रतिनिधि पार्टी लाइन के बजाय अपनी लाइन तैयार किए हैं। जिसके असर योजनाओं पर पड़ रहा है। इन सबकी भनक पार्टी हाईकमान को है।
वहीं से मिले निर्देश के बाद ही सीएम हादसे के पांच दिन बाद यहां आए और केंद्र की योजनाओं की प्रगति जानने के लिए देर रात सवा दो घंटे निरीक्षण किए। जनप्रतिनिधियों की आपसी खींचतान का असर पीएम की योजनाओं पर पड़ रहा है।
जिसे लेकर हाईकमान चितिंत है। योजनाओं को समय पर पूरा कराने में अधिकारी यदि बरगलाए तो जनप्रतिनिधियों का दायित्व होता है उनकी रिपोर्ट शासन से करें। यहां ऐसा नहीं है। अधिकारियों और जनप्रतिनिधियों के गठजोड़ का असर पीएम की योजनाओं पर पड़ रहा है।
निर्माणाधीन चौकाघाट-लहरतारा फ्लाईओवर की दो बीम गिरने से हुई 15 मौतों से जुड़े मुकदमे की तफ्तीश गति नहीं पकड़ पा रही है। प्रदेश सरकार के स्तर से सख्त निर्देश के बावजूद पुलिस हादसे के पांच दिन बाद भी आरोपियों को गिरफ्तार करना तो दूर पुलिस उन्हें गिरफ्तार तक नहीं कर सकी है।
पुलिस की कार्रवाई महज साक्ष्य एकत्र करने तक ही सीमित है और इसे लेकर आमजन में खासा आक्रोश है। लोगों का कहना है कि जब प्रदेश सरकार की तकनीकी समिति ने दोषियों को चिह्नित कर दिया है तो उनके खिलाफ कार्रवाई में देरी क्यों की जा रही है।
15 मई की शाम साढ़े पांच बजे के लगभग निर्माणाधीन फ्लाईओवर की दो बीम कैंट रेलवे स्टेशन के समीप एईएन कॉलोनी के सामने सड़क पर गिर गई थी। हादसे में एक बीम के नीचे दबे वाहनों में 15 लोगों की मौत हो गई थी और 11 लोग घायल हो गए थे।
16 मई को पुलिस की ओर से सिगरा थाने में सेतु निगम के अधिकारियों और कर्मचारियों के खिलाफ मुकदमा दर्ज किया गया। इसके बाद पुलिस की कार्रवाई ठोस तरीके से नजर नहीं आई।
सिगरा थाने में दर्ज मुकदमे की विवेचना कर रही क्राइम ब्रांच फिलहाल साक्ष्य एकत्र करने और बयान दर्ज तक ही सीमित है। इसे लेकर लोगों का कहना है कि आखिर इतने गंभीर मामले की तफ्तीश और कार्रवाई में पुलिस को समय क्यों लग रहा है।