प्रदेश में मायानगरी फिल्मसिटी का बनना किसी सपने के साकार होने जैसा है। कलाकारों का कहना है कि मुख्यमंत्री फिल्मसिटी नहीं एक सुनहरा सपना लेकर आ रहे हैं। इससे ना सिर्फ रोजगार के अवसर बढ़ेंगे वहीं पर्यटन की असीम संभावनाएं भी साकार होंगी।
मायानगरी में कलाकार से लेकर तकनीशियन में उत्तर भारतीयों का ही दबदबा है। गुजरे जमाने की बात करें तो सुजीत कुमार, लीला मिश्रा, कन्हैया कुमार ने बनारसी अंदाज को फिल्मों में सजाया। वही गीतकार समीर बॉलीवुड इंडस्ट्री में जाना माना नाम हैं। गीतकार समीर अंजान का कहना है कि फिल्म सिटी के बनने से बहुत बड़ा बदलाव आएगा। मुंबई में बहुत पुरानी फिल्म सिटी है लेकिन अगर अच्छी चीज बनेगी तो उससे विकास, रोजगार और अवसर मिलेंगे। दो जगह होने से काम बंटेगा और मुंबई का दबाव कम होगा।
टीवी व फिल्म कलाकार तिलकराज मिश्र ने बताया कि प्रयागराज, सोनभद्र, चंदौली, वाराणसी समेत पूर्वांचल में फिल्म की रियल लोकेशन मिलेगी। पर्यटन, ट्रैवल और होटल इंडस्ट्री में संभावनाएं और रोजगार के अवसर बढ़ेंगे। कलाकार और तकनीशियन को अपने प्रदेश से बाहर नहीं जाना होगा।
पद्मश्री डॉ. सोमा घोष का कहना है कि यूपी में फिल्म इंडस्ट्री के निर्माण से कलाकारों की संभावनाओं के द्वार खुलेंगे। प्रतिभाओं का प्रदेश है उत्तर प्रदेश। निर्माता, निर्देशक, अभिनेता, गीतकार, संगीतकार से लेकर टेक्नीशियन भी काफी संख्या में यूपी से ही हैं। अपना घर, गांव और प्रदेश को छोड़कर लोगों का नहीं भटकना होगा। शूटिंग की लोकेशन भी सहजता से उपलब्ध होंगी।
भोजपुरी फिल्मों के अभिनेता सत्येंद्र सिंह का कहना है कि यूपी में फिल्म इंडस्ट्री का निर्माण भोजपुरी फिल्मों के लिए सबसे सुखद होगा। बजट के साथ ही लोकेशन और कलाकारों को सहूलियत भी होगी। प्रदेश सरकार के इस कदम से भोजपुरी फिल्म इंडस्ट्री का विकास होगा।