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क्लाइमेट एजेंडा की रिपोर्ट: 6 गुना ज्यादा प्रदूषित हुई काशी की हवा, इंग्लिशिया लाइन और पांडेयपुर बने गैस चैंबर

Wed, 26 Oct 2022 04:01 PM IST
किरन रौतेला न्यूज डेस्क, अमर उजाला, वाराणसी

सार

दिवाली पर वाराणसी में वायु प्रदूषण की एक विस्तृत रिपोर्ट क्लाइमेट एजेंडा की ओर से जारी की गई है। इस रिपोर्ट के अनुसार, बनारस में ग्रीन पटाखे और जिला प्रशासन की ओर से हुई अपील इस बार पुनः बेअसर साबित हुई। कोविड 19 के साथ साथ अन्य सांस सम्बन्धी संक्रमण के खतरों के मद्देनजर, बनारस में वायु गुणवत्ता ठीक रखने के उद्देश्य से प्रत्येक साल के लिए जारी NGT के दिशा निर्देशों की खुल कर अवहेलना हुई और जिला प्रशासन हर वर्ष की तरह इस बार भी मूकदर्शक बना रहा।
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वाराणसी में प्रदूषण - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
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क्लाइमेट एजेंडा की ओर से हर साल की तरह सातवीं बार इस साल भी दिवाली पर वाराणसी में वायु प्रदूषण की एक विस्तृत रिपोर्ट आज यानि 26 अक्तूबर 2022 को जारी की गई। इस रिपोर्ट के अनुसार, बनारस में ग्रीन पटाखे और जिला प्रशासन की ओर से हुई अपील इस बार पुनः बेअसर साबित हुई। कोविड 19 के साथ साथ अन्य सांस सम्बन्धी संक्रमण के खतरों के मद्देनजर, बनारस में वायु गुणवत्ता ठीक रखने के उद्देश्य से प्रत्येक साल के लिए जारी NGT के दिशा निर्देशों की खुल कर अवहेलना हुई और जिला प्रशासन हर वर्ष की तरह इस बार भी मूकदर्शक बना रहा। रात दस बजे के बाद पूर्ण रूप से पटाखा प्रतिबन्ध के लिए जारी आदेश को ताक पर रखते हुए काशीवासियों ने जहां एक तरफ जम कर पटाखे बजाये, वहीं दूसरी ओर इन पटाखों से शहर में पी  एम 2.5, पी एम 10 और वायु गुणवत्ता सूचकांक का स्तर भारत सरकार और विश्व स्वास्थ्य संगठन (डब्ल्यू एच ओ) , दोनों के ही मानकों की तुलना में काफी खराब हो गया।
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क्लाइमेट एजेंडा की रिपोर्ट जारी - फोटो : अमर उजाला
शहर के 12 विभिन्न इलाकों में वायु गुणवत्ता जांच की मशीनें लगा कर दिवाली की अगली सुबह तीन बजे से आठ बजे तक यह आंकड़े एकत्र किये गए। प्राप्त आंकड़ों के बारे में मुख्य अभियानकर्ता एकता शेखर ने बताया “शहर में पी एम 10 मुख्य प्रदूषक तत्व रहा. इंगलिशिया लाइन, पांडेयपुर और आशापुर सबसे अधिक प्रदूषित रहा जहां वायु गुणवत्ता सूचकांक विश्व स्वास्थ्य संगठन की तुलना में 6 गुणा अधिक प्रदूषित रहा जबकि भारत सरकार द्वारा घोषित मानकों की तुलना में उपरोक्त तीनों स्थान तीन गुणा अधिक प्रदूषित पाए गए। लहुराबीर, आशापुर और मैदागिन क्षेत्र भी कमोबेश एक जैसे ही पाए गये जहां का वायु गुणवत्ता सूचकांक डब्लू एच ओ के मानकों की तुलना में लगभग 5 गुणा अधिक प्रदूषित रहा जबकि भारत सरकार के मानकों की तुलना में 2.5 गुणा अधिक प्रदूषित रहा। ज्ञात हो कि डब्ल्यू एच ओ के मानकों के अनुसार जब वायु गुणवत्ता सूचकांक 45 माइक्रोग्राम प्रति घनमीटर से ऊपर जाए तो हवा को प्रदूषित मानते हैं, जबकि भारत सरकार के द्वारा तय मानकों के अनुसार जब यह आंकड़ा 100 के पार पहुंचे तब शहर को प्रदूषित माना जाता है. लम्बे समय से डब्ल्यू एच ओ का यह आग्रह है कि वैश्विक स्तर पर जन स्वास्थय सुरक्षा का ध्यान रखते हुए सभी देश उनके द्वारा घोषित मानदंड का ही अनुपालन सुनिश्चित करें। 

 

वाराणसी में वायु प्रदूषण - फोटो : अमर उजाला
कोविड संक्रमण के कारण पहले से ही लाखों लोगों के कमजोर हो चुके फेफड़ों समेत बच्चों, वरिष्ठ नागरिकों व पहले से ही अन्य किसी बीमारियों से ग्रषित व्यक्तियों के समक्ष आसन्न खतरों के बारे में एकता शेखर ने कहा “विभिन्न राष्ट्रीय व अंतर्राष्ट्रीय एजेंसियों द्वारा जारी अध्ययनों के अनुसार हवा में बढ़ते हुए प्रदूषण से उपरोक्त सभी किस्म के व्यक्तियों के स्वास्थ्य पर गहरा असर पड़ता है। इन्हीं अध्ययनों का संज्ञान लेते हुए माननीय राष्ट्रीय हरित प्राधिकरण ने अत्यधिक प्रदूषित हवा वाले शहरों में पटाखे के क्रय विक्रय पर कुछ शर्तों के आधार पर  प्रतिबन्ध लगाने का आदेश जारी किया था।  इसके अनुपालन की जिम्मेदारी राज्य शासन ने सम्बंधित जिला प्रशासनों को दी थी लेकिन उक्त आदेश की अवहेलना करने वालों के सामने जिला प्रशासन बौना साबित हुआ। इससे न केवल शहर की आबोहवा खराब हुई, बल्कि श्वांस संबंधी रोगों का उपचार कराने वाले सहित अन्य बच्चे, बूढ़े व कोविड 19 के शिकार रह चुके व्यक्तियों के सामने बारम्बार यह विकट परिस्थिति पैदा हुई है।  प्रशासन ने जिम्मेदारी का परिचय दिया होता, तो ऐसा होने से रोका जा सकता था।”
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वाराणसी में जमकर चले पटाखे। - फोटो : संवाद न्यूज एजेंसी
हालांकि, दिवाली के समय खराब हुई आबोहवा के लिए पटाखों के साथ साथ शहर की बेहद खराब कचरा प्रबंधन व्यवस्था भी जिम्मेदार है। शहर के विभिन्न इलाकों में दिवाली के समय हुई घरों की साफ़ सफाई के बाद कचरे का जलाया जाना भी वायु प्रदूषण को काफी हद तक बढाता है। क्लाइमेट एजेंडा ने हमेशा यह स्पष्ट करने की कोशिश की है कि प्रदूषण नियंत्रण किसी एक विभाग की जिम्मेदारी नहीं हो सकती, बल्कि नगर निगम, परिवहन, पी डब्ल्यू डी समेत प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड और आम नागरिकों को अपनी अपनी जिम्मेदारियों का निर्वहन करने से ही प्रदूषण नियंत्रण संभव हो सकेगा। 
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