बता दें कि स्वच्छता सर्वेक्षण में वाराणसी नगर निगम तीन पायदान खिसक कर 30वें नंबर पर पहुंच गया था। नगर निगम के पास पुरानी गलतियों को सुधारने का अंतिम मौका है। पिछले साल की तुलना में वाराणसी नगर निगम ने संसाधन के साथ ही सुविधा विस्तार तो किया, मगर दो साल से प्रयास के बाद भी अपनी व्यवस्था का सर्टिफिकेशन नहीं करा पाया है।
दरअसल, स्वच्छता सर्वेक्षण 2021 छह हजार अंकों का होता है और इसमें सिटीजन वाइज व सर्टिफिकेशन के 3600 अंक हैं। इसमें वाराणसी नगर निगम अपनी बढ़त नहीं बना पाया और उसकी रैंकिंग बिगड़ी।
पब्लिक फीडबैक के दौरान टीम को स्थानीय लोगों ने बताया कि नगर निगम को ठेलों की संख्या बढ़ानी चाहिए। कई बार लोग कूड़ा लेकर इंतजार करते हैं। ठेले नहीं मिलने पर कूड़े को इधर उधर फेंककर चले जाते हैं। लोगों का यह काम शहर की सफाई में बाधक बनता है। इसके बाद शौचालयों के साथ ही सड़कों और नालियों के पास ब्लीचिंग पाउडर की जांच की और जानकारी भी ली।
मानकों को पूरा कराने के लिए तीन अधिकारी नामित
वाराणसी नगर निगम प्रशासन ने शहर में बेहतर साफ-सफाई व स्वच्छता सर्वेक्षण-2022 के मानकों को पूरा करने के लिए तीन अधिकारियों को नामित किया है। आयुक्त प्रणय सिंह की ओर से नामित अधिकारियों में दो अपर नगर आयुक्त और एक संयुक्त नगर आयुक्त हैं। अपर नगर आयुक्त दुष्यंत कुमार मौर्या को वरुणापार व आदमपुर जोन, अपर नगर आयुक्त सुमित कुमार को कोतवाली व दशाश्वमेध जोन व संयुक्त नगर आयुक्त जगदीश यादव को भेलूपुर जोन की जिम्मेदारी सौंपी गई है।