पाइप लीकेज मामले में की जांच के लिए गठित दो सदस्यीय समिति ने कार्यदायी संस्था को क्लीनचिट दे दिया है। समिति ने जमीन धंसने और घरों में आई दरार के लिए गंगा में आई बाढ़ को जिम्मेदार बताया है। दो सदस्यीय समिति में शामिल आईआईटी बीएचयू के प्रो. केके पांडे और डॉ. राजेश कुमार की रिपोर्ट के अनुसार मिट्टी धंसने की घटना को रोकने के लिए गंगा किनारे पाइप के नीचे पाइलिंग करने और रिटेनिंग वाल बनाने की संस्तुति की गई है।
एसएल इंफ्रा (इएसएसईएल) के वाराणसी यूनिट हेड पल्लभ श्रीवास्तव ने बताया कि 102 करोड़ की लागत से 2018 में पाइप बिछाने का कार्य शुरू किया था। इसे तीन साल में पूरा कर पंपिंग स्टेशन 31 मार्च 2021 को शुरू हुआ। स्टेशन से 9500 मीटर पर लिकेज को ठीक कर दिया गया है। संस्तुति पर कार्यदायी संस्था ने वेंटेक कंपनी को डिजाइन का जिम्मा सौंपा है। सोमवार तक डिजाइन मिलने की संभावना है।
क्लीनचिट पर उठाए सवाल
पाइप लीकेज मामले में क्लीनचिट दिए जाने पर क्षेत्रीय लोगों और विशेषज्ञ ने सवाल उठाए हैं। आईआईटी बीएचयू के प्रो. विश्वंभरनाथ मिश्र ने मामले में कार्यदायी संस्था को क्लीनचिट देने को हास्यास्पद बताते हुए कहा कि गंगा किनारे से सिर्फ 70 फीट की दूरी ही बाढ़ से प्रभावित हुई है। यह बात हजम नहीं हो रहा। कहा कि पाइप बिछाने में तकनीकी पहलू का ध्यान नहीं रखा गया। क्षेत्रीय लोगों का कहना है कि जल्दबाजी में मानकों की अनदेखी की गई है।
गंगा में आई बाढ़ के बाद मिट्टी से हुए रिसाव से जमीन धंसी, इसका असर पाइप पर भी पड़ा है। पाइप में लिकेज से यहां ज्यादा कटान हुआ है। लीकेज की मरम्मत करा दी गई है। एहतियात लीकेज की विस्तृत जांच कराई है। -एके बर्मन, जीएम जलनिगम ग्रामीण।
मिट्टी गिली होने की वजह से इसका सेटलमेंट हुआ है। घरों के निर्माण में तकनीक का प्रयोग नहीं किया गया है। पाइप निर्माण से समस्या नहीं हुई है। इसके बावजूद लोगों की सुरक्षा के लिए हम जरूरी उपाय कर रहे हैं। -पल्लभ श्रीवास्तव एसएल इंफ्रा, वाराणसी यूनिट हेड