लाइट मेट्रो और रोपवे से जुड़ेगा वाटर वे
वाराणसी। शहर की यातायात व्यवस्था सुधारने के लिए योजना को मूर्त रूप दिया जा रहा है। इसके तहत लाइट मेट्रो, रोपवे, वाटरवेज और सड़क मार्ग का प्रस्ताव तैयार किया गया है। राइट्स ने सोमवार को सर्वे रिपोर्ट के आधार पर प्रस्तावित यातायात व्यवस्था का प्रस्तुतीकरण किया।
रिपोर्ट के अनुसार, शहर के चार स्थानों पर ट्रैफिक को इंटरकनेक्ट किया जाएगा, ताकि लोगों को यातायात के माध्यम और रूट बदलने में आसानी हो। पुराने शहर में भी व्यवस्था सुधारने के लिए कार्ययोजना तैयार की गई है। हालांकि इस रिपोर्ट में सुधार के निर्देश दिए गए हैं। अब अगस्त में शहरी विकास मंत्रालय के सचिव के वाराणसी दौरे के दौरान योजना का प्रस्तुतीकरण किया जाएगा।
राइट्स ने शहर के ट्रैफिक को चार भागों में बांटने का प्रस्ताव दिया है। इसमें बाबतपुर रोड स्थित भेल से लंका तक 13 किलोमीटर के लाइट मेट्रो का प्रस्ताव है। यह अर्दली बाजार, नदेसर, मलदहिया, सिगरा, भेलूपुर होते हुए लंका तक जाएगी। पुराने शहर में रोपवे का प्रस्ताव दिया गया है। इसके तहत 16 किमी लंबी रोपवे से पुराने शहर को इंटरकनेक्ट किया जाएगा। इसके बाद खिड़किया घाट से अस्सी तक वाटरवेज विकसित किया जाएगा। इसी तरह शहर की चौड़ी सड़कों पर इलेक्ट्रिक बस का संचालन कराया जाएगा।
आईएमएस की तर्ज पर होेंगे स्टेशन
काशी स्टेशन पर प्रस्तावित इंटर मॉडल स्टेशन की तर्ज पर नई यातायात व्यवस्था में चार स्टेशन इंटरकनेक्ट होंगे। लाइट मेट्रो के 13 स्टेशन होंगे। इसके अलावा कैंट, सिटी रेलवे स्टेशन के अलावा खिड़किया घाट और लंका पर इंटरकनेक्ट स्टेशन होंगे।
केंद्र सरकार को जाएगा प्रस्ताव
नई यातायात व्यवस्था के लिए शहरी विकास मंत्रालय से फंड की उम्मीद है। लिहाजा प्रस्ताव केंद्र सरकार को भेजा जाएगा। करीब पांच हजार करोड़ रुपये की इस परियोजना की फंडिंग के लिए कई विभागों को शामिल किया जाएगा।
यह है प्रस्ताव
- भेल से लंका तक लाइट मेट्रो की दूरी 13 किलोमीटर
- 200 करोड़ रुपये प्रति किलोमीटर का खर्च लाइट मेट्रो पर
- पुराने शहर में 16 किलोमीटर का तैयार होगा रोपवे
- 75 से 80 करोड़ रुपये प्रति किलोमीटर तैयार करने में होंगे खर्च
- रोपवे, मेट्रो और वाटरवेज को भी किया जाएगा इंटरकनेक्ट
-------कोट-------
राइट्स से प्रस्तुतीकरण दिया है, मगर उनके प्रस्ताव में कई सुधार की आवश्यकता है। चर्चा के बाद कुछ सुधार करने के लिए कहा गया है। इसके बाद इसे शासन के समक्ष प्रस्तुत किया जाएगा। -दीपक अग्रवाल, मंडलायुक्त