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ओपीडी में भीड़, भटकते रहे मरीज, सांसत

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बीएचयू अस्पताल में इलाज के लिए भटकते रहे मरीज
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वाराणसी। बीएचयू के सर सुंदरलाल अस्पताल और ट्रामा सेंटर के रेजीडेंटों की दो दिवसीय हड़ताल के पहले दिन सोमवार को मरीजों को मुसीबत झेलनी पड़ी। ओपीडी में मरीजों की भीड़ लगी रही, लेकिन केवल सीनियर डॉक्टरों के देखने की वजह से उन्हें काफी देर तक इंतजार करना पड़ा। सातवें वेतन आयोग की मांग पूरी न होने के विरोध में की गई हड़ताल का असर ऑपरेशन पर भी पड़ा।
कुछ विभागों में मरीजों को बिना ऑपरेशन लौटना पड़ा। वार्ड में इलाज की पूरी व्यवस्था पैरामेडिकल स्टॉफ के हवाले रही। यहां चिकित्सकों के राउंड के बाद जहां हर दिन रेजिडेंट रहते थे, वहां कोई नहीं था। बीएचयू अस्पताल में बनारस के अलावा अलावा आजमगढ़, मऊ, जौनपुर, गोरखपुर, महराजगंज, देवरिया, कुशीनगर आदि इलाकों के साथ ही छत्तीसगढ़, बिहार और नेपाल तक के करीब पांच हजार मरीज हर दिन ओपीडी में आते हैं।
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सोमवार सुबह पहले पर्चा काउंटर पर लंबी लाइन लगानी पड़ी। यहां से ओपीडी पहुंचे तो वहां भी भीड़ रही। आम दिनों में ओपीडी में औसतन तीन से चार रेजिडेंट बैठते हैं, वहीं सोमवार को केवल सीनियर डॉक्टर ही बैठे रहे। बाल रोग विभाग, हृदय रोग, टीबी एंड चेस्ट, न्यूरोलॉजी, चर्म रोग, मेडिसिन आदि में मरीजों के साथ ही तीमारदार भी परेशान रहे। कोई स्ट्रेचर पर मरीज को लेकर खड़ा रहा तो कोई ट्राईसाइकिल पर बिठाकर एक विभाग से दूसरे विभाग तक भटकता रहा। कई मरीज अन्य अस्पतालों में इलाज कराने चले गए।
इमरजेंसी में रहा अधिक दबाव
ओपीडी और वार्ड में रेजिडेंटों के काम न करने की वजह से इमरजेंसी में अधिक दबाव रहा। जो ओपीडी में नहीं दिखा पाए, उन्होंने इमरजेंसी में जाकर चिकित्सकों को दिखाया। जिन्हें ओपीडी में रेफर किया गया, वह अपनी बारी का इंतजार करते रहे।
बिना ऑपरेशन लौटे मरीज
हड़ताल से कई विभागों के ऑपरेशन भी प्रभावित हुए और मरीजों को लौटना पड़ा। अमूमन ऑपरेशन में सीनियर डॉक्टरों का रेजिडेंट सहयोग करते हैं, लेबर इमरजेंसी, आईसीयू और लेबर रूम को छोड़कर अन्य ऑपरेशन थिएटर में रेजिडेंटों ने सहयोग नहीं किया। उधर अस्पताल के चिकित्सा अधीक्षक डॉ. एसके माथुर के मुताबिक, हड़ताल के बाद भी 83 ऑपरेशन हुए।
आज भी रहेगी हड़ताल
बीएचयू ट्रामा सेंटर सभागार में सोमवार दोपहर बैठक कर रेजिडेंटों ने सातवें वेतन आयोग की उनकी मांग पर कोई कार्रवाई न होने पर नाराजगी जताई। कहा कि पिछले तीन साल से कई पत्र, आरटीआई के माध्यम से जानकारी मांगने के बाद भी न तो सटीक जवाब मिला और न ही कोई कार्रवाई हुई। अस्पताल प्रशासन से भी इस बारे में बातचीत की गई, लेकिन सही जवाब नहीं मिला। बैठक में मंगलवार को भी हड़ताल करने का निर्णय हुआ। बताया कि मंगलवार को भी ओपीडी, वार्ड और ऑपरेशन थिएटर में सेवा नहीं दी जाएगी।
सोमवार की स्थिति
पर्चा बिक्री ओपीडी 3,098
ओपीडी में पंजीकरण 3,834
वार्डों में भर्ती मरीज 81
डिस्चार्ज 94
इमरजेंसी ओपीडी 63
ऑपरेशन 83
कुल जांच 3092
---कोट---
ओपीडी में पहले डॉक्टर को दिखा लेंगे, इसलिए सुबह 7 बजे ही अस्पताल आ गए थे। यहां आने पर पता चला कि हड़ताल है। चार घंटे बाद किसी तरह डॉक्टर ने देखा। -धर्मेंद्र, चंदौली
हड़ताल के बारे में पता होता तो सोमवार को अस्पताल आते ही नहीं। पहले ट्रेन में परेशानी झेलनी पड़ी, किसी तरह यहां पहुंचे तो ओपीडी के बाहर काफी देर तक इंतजार करना पड़ा। -जानकी, नौतनवां
तीन महीने पहले सड़क दुघर्टना में दाहिने पैर की सर्जरी हुई थी। चिकित्सक ने सोमवार को ट्रामा सेंटर में जांच के लिए बुलाया था। सुबह 9 बजे आ गए थे, लेकिन दोपहर दो बजे दिखा सके। -त्रिलोकी नाथ, जौनपुर
जांच रिपोर्ट दिखानी थी, उसमें भी तीन घंटे लग गए। हड़ताल होने से परेशानी का सामना करना पड़ता है। अस्पताल के अधिकारियों को इस पर ध्यान देना चाहिए। -सावित्री पाल, मंडुवाडीह
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कोट
रेजिडेंटों की मांग पर एमएचआरडी की ओर से कार्रवाई चल रही है। इससे रेजिडेंटों को भी अवगत कराया जा चुका है। हड़ताल के दौरान किसी को परेशानी न हो, इसके लिए संबंधित चिकित्सकों के साथ ही पैरामेडिकल स्टाफ को मॉनीटरिंग करने को कहा गया है। -डॉ. एसके माथुर, चिकित्सा अधीक्षक, सर सुंदरलाल अस्पताल
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