सूबे की सत्ता बदलने के बाद आला अफसर भले ही कार्यशैली में बदलाव के दावे कर रहे हों, मगर हकीकत इससे जुदा है। सरकारी मशीनरी अब भी पुराने ढर्रे पर ही काम करने पर आमादा है। कुछ विभागों को तो मंत्री के निर्देशों की भी परवाह नहीं।
नगर निगम प्रशासन भी इन्हीं में से है। आज सूबे के नगर विकास मंत्री सुरेश खन्ना शहर में इस हकीकत से रू-ब-रू होंगे।
बीते 15 अप्रैल को दौरे पर आए नगर विकास मंत्री ने नगर निगम कार्यालय का औचक निरीक्षण किया था। इस दौरान उन्होंने देखा कि कार्यालय परिसर में कबाड़ के ढेर थे, डस्टबीन गंदे पड़े थे, चीफ इंजीनियर के कमरे में लगी घड़ी बंद थी।
यही नहीं, कर्मचारियों की हाजिरी के लिए लगी बायोमैट्रिक मशीन खराब पड़ी थी। 17 कर्मचारी बगैर सूचना के गैरहाजिर मिले थे। यह सब देख उन्होंने कड़ी नाराजगी जताते हुए 20 मई यानी उनके इस दौरे तक हालात में मुकम्मल सुधार लाने के निर्देश दिए थे। पर हालात आज भी जस के तस हैं।
पिछले दौरे पर मंत्री ने दिए थे ये निर्देश
- कार्यालय भवन का रंग-रोगन कराया जाए
- परिसर में खराब पड़े वाहन हटाए जाएं
- जगह-जगह लटके बिजली के तार दुरुस्त हों
- कार्य प्रणाली में सुधार लाने की चेतावनी
- दीवारों पर पान की पीक नहीं होनी चाहिए
- कर्मचारी समय से कार्यालय में उपस्थित हों