अदालत में पवन सिंह की ओर से उनकी मां की तबीयत खराब होने का कारण बताया गया। इससे पहले नौ सितंबर की सुनवाई में भी पवन सिंह अदालत में उपस्थित नहीं हुए थे। उस समय उनके अधिवक्ता हरिवंश सिंह ने पटना में बाढ़ के कारण रास्ता बाधित होने का हवाला देते हुए प्रार्थना पत्र दिया था। अदालत ने तब भी एक हजार रुपये का हर्जाना लगाते हुए अगली तारीख पर पवन सिंह को व्यक्तिगत रूप से उपस्थित होने का निर्देश दिया था।
ज्योति सिंह के अधिवक्ता अखिलेश सिंह ने अदालत में कहा कि पवन सिंह लगातार तारीखों पर उपस्थित नहीं हो रहे हैं। उनके अनुसार इससे पहले 11 अगस्त को भी पवन सिंह को अपना पक्ष रखने के लिए अदालत में उपस्थित होना था, लेकिन वह उस तारीख पर भी हाजिर नहीं हुए।
कोर्ट रूम से बाहर आतीं ज्योति सिंह।
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परिवार न्यायालय की अदालत में सुनवाई के बाद ज्योति सिंह ने सास की तबीयत खराब होने के सवाल पर कहा कि उन्हें सोशल मीडिया के माध्यम से इसकी जानकारी मिली है। उन्होंने कहा कि मन तो कर रहा है कि सास को देखने जाएं, लेकिन पिछले दिनों अपने साथ हुए दुर्व्यवहार के कारण वह स्वयं नहीं जा सकतीं। सास की तबीयत की जानकारी लेने के लिए उन्होंने अपने भाई को भेजा है। साथ ही उनके जल्द स्वस्थ होकर घर लौटने की प्रार्थना कर रही हैं।
पवन सिंह और ज्योति सिंह का विवाह छह मार्च 2018 को हुआ था। वैवाहिक विवाद के बाद ज्योति सिंह ने 22 अप्रैल 2022 को बलिया परिवार न्यायालय में अंतरिम भरण-पोषण की याचिका दाखिल की थी। दोनों पक्षों के बीच विवाद सुलझाने के लिए अदालत की ओर से काउंसिलिंग भी कराई गई, लेकिन समाधान नहीं हो सका। मामले में आगे की सुनवाई अब 17 अक्टूबर को होगी।
पहले साथ रहने की इच्छा, फिर अलगाव पर 10 करोड़ की थी मांग
आरा परिवार न्यायालय में फरवरी 2026 की सुनवाई के दौरान ज्योति सिंह ने पति के साथ रहने की इच्छा जताई थी। रिपोर्ट के अनुसार उन्होंने कहा था कि यदि पवन सिंह साथ नहीं रखना चाहते तो 10 करोड़ रुपये भरण-पोषण दिया जाए। मार्च की कार्यवाही में पवन सिंह की ओर से साथ नहीं रहने का रुख सामने आने के बाद ज्योति पक्ष ने 10 करोड़ रुपये और मकान की मांग रखी। इस मामले में अदालत की कार्यवाही के दौरान सुलह की संभावना पर भी विचार हुआ था।